सूत्र,आगम
1आचारांग सूत्र,:- इसमें श्रमण निर्ग्रन्थ (साधु-साध्वी जी ) के आचरण विषयक, विनय, स्वाध्याय, प्रतिलेखना, गोचरी, वस्त्र, तपस्या, पात्र आदि विषयों का सूक्ष्म प्रतिपादन किया हुआ है। 2 ) सूत्रकृतांग सूत्र इसमें लोक, अलोक, जीव, अजीव स्वसमय, परसमय आदि का निर्देशन एवं क्रियावादी अक्रियावादी आदि 363 पाखंड मतों पर चिन्तन किया है। स्थानांग सूत्र इसमें 1 से लेकर 10 तक के भेदों वाली ज्ञानवर्धक वस्तुओं / स्थानों 3)स्थानांग सूत्र:-इसमें 1 से लेकर 10 तक के भेदों वाली ज्ञानवर्धक वस्तुओं / स्थानों पर विशद वर्णन है पर विशद वर्णन है। प्रथम प्रकरण में 1-1, दूसरे में 2-2 इत्यादि अनुक्रम से हैं। 4) समवायांग सूत्र - इसमें भी स्थानांग की भाँति 1 से 100 तथा उत्तरोत्तर क्रम के संग्रह कोश रूप भी विविध ज्ञानवर्धक वस्तुओं का समावतार है। व्याख्या प्रज्ञप्ति (भगवती सूत्र ) प्रश्नोत्तर शैली में निबद्ध इस आगम में 5)व्याख्या प्रज्ञप्ति (भगवती सूत्र)प्रश्नोत्तर शैली में निबद्ध इस आगम मेंप्रभु वीर द्वारा गौतमादि शिष्यों को प्रदान किए गए 36000 प्रश्नों के समाधान संकलित हैं। 6 ) ज्ञाताधर्मकथांग सूत्र- इसमें उदाहरण और उ...