गृह प्रवेश पर कविता
> *माँ के सपनों का घर - "दादी माँ का आशीर्वाद"* पूरी हुई आज चिरप्रतीक्षित साध जुने घर में जो नूतन घर के सपने पले थे, माँ की आँखों में जो दिये जले थे, आज उन्हीं सपनों ने आकार लिया है, *और घर का नाम - "दादी माँ का आशीर्वाद" दिया हैं।* जिस घर की हर दीवार पर आपकी दुआ लिखी थी, जिस आँगन में आपकी हसीं यादे बसी थी, उसी आँगन को बेटों ने फिर संवारा है, आपकी ममता से ही तो ये घर निखरा है। भाई-भतीजो ने मिलकर ये मातृत्व ऋण का अंश चुकाया है, आपकी हर श्वास को सुख में बदल दिया है, यह नया घर नहीं, नया तीर्थ बना है, *क्योंकि ये घर " माँ केआशीर्वाद" से बना है।* आओ माँ, इस नई देहरी पर पदार्पण करो अपनी ममता का दीप जला घर की देहरी पर सुमन अर्पण करो ये घर नहीं,आपकी तपस्या का फल है, आपके साथ तो इसका पानी भी गंगाजल है। गृह प्रवेश नहीं, ये सम्मान हैआपका, हर ईंट पर लिखा है ,नामआपका, *पुरखों की आत्मा भी आज तृप्त हुई हैं -* उनकी ही जमी पर तो खड़ी यह इमारत हुई हैं इस नए घर की हर साँस आप हो, इस आँगन की तुलसी, इस द्वार की कुंकुम आप हो। गृह ...