आचार्य के लिए संबोधन
हे कामदेव के विजेता! सावद्यकार्यों के राग बंधन को छोड़ने वाले! संयम के भार को उठाने वाले! और समाधिपूर्वक मोहरूपी महाग्रह को वश करने वाले, हे मुनीश्वर! आप विजयी रहो! देव और विद्याधरों से वंदनीय ! रागरूपी महान् हाथी का नाश करने में सिंह समान और स्त्रियों के तीक्ष्ण कटाक्ष रूपी लाखों बाणों से भी क्षोभित नहीं होने वाले हे महामुनीश्वर! आपकी जय हो! तीव्र दुःखरूपी अग्नि से जलते प्राणियों के अमृत की वर्षा समान! काश नामक वनस्पति के उज्ज्वल पुष्पों के प्रकाश सदृश, उछलते उज्ज्वल यश से दिशाओं को भी प्रकाशमय बनाने वाले हे मुनीश्वर! आपश्री की जय हो! कलिकाल के फैले हुए प्रचण्ड अंधकार से नाश होते मोक्ष मार्ग के प्रकाशक प्रदीप रूप! महान् गुणों रूपी असामान्य श्रेष्ठ रत्नसमूह के निधान हे मुनीश्वर ! आप विजयी बनों! हे नाथ! रोग से पीड़ित देह के त्याग के लिए भी मेरा आगमन आपके चरण कमल के प्रभाव से आज निश्चय सफल हुआ है। इसलिए हे जगत् बन्धु! आज से आप ही एक मेरे माता, पिता, भाई और स्वजन हो, हे मुनीश्व