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शुभकामनाएं

 पलक हमारी दूसरी पीढ़ी की तुम पहली आंनद फुहार  हो तुम्हारी हर नई हरकत,  हर नयी दन्त विहीन पहली मुस्कान हो  (तुम्हारे रुप  में लिखा गया हमारे मन में एक वात्सल्य काव्य हो ) आज मायरे में तुम्हारे , अंगड़ाई ले रहे हमारे सुप्त से अरमान हैं नाना मामा मामी  की यहीं शुभकामनाएं हैं कोई अधूरी तुम्हारी चाह न हो, व्यवधान  भरी तुम्हारी राह ना हो जब भी तुम मांगों नभ का एक तारा तो रब दे दे आसमान सारा  श्रेयांस के साथ हो रजत मय दिन औऱ नीलम सी  पगी रातें   जिंदगी का हर इक पल ले आये तुम्हारे लिये नित नई सौगाते  इतनी सी  हमारी दुआ क़बूल हो जाये, की तुम्हारी हर दुआ क़बूल हो जाये, 🌷🌷🌷🌷 घणे हरख  स्यूँ हुए शादी रा नेग चार , चारों मेर सुगणा रा बधावाँ गुंज्या है  पलक और श्रेयांस ने देख लागे गौर  परणीजण ने ईशर  घर आव्या है, नाना मामा मामी  रे मन में भी तो हरख  घणो छायो हैं जद ही तो मायरे  की शुभ घड़ी में पलक ने आशिष देवण आप सब ने  घणे  मानस्यूँ बुलायो हैं स्वीकारो आज छोटो सो ओ भेंट स्वरूप बधावो  ...

आचार्य के लिए संबोधन

 हे कामदेव के विजेता! सावद्यकार्यों के राग बंधन को छोड़ने वाले! संयम के भार को उठाने वाले! और समाधिपूर्वक मोहरूपी महाग्रह को वश करने वाले, हे मुनीश्वर! आप विजयी रहो! देव और विद्याधरों से वंदनीय ! रागरूपी महान् हाथी का नाश करने में सिंह समान और स्त्रियों के तीक्ष्ण कटाक्ष रूपी लाखों बाणों से भी क्षोभित नहीं होने वाले हे महामुनीश्वर! आपकी जय हो! तीव्र दुःखरूपी अग्नि से जलते प्राणियों के अमृत की वर्षा समान! काश नामक वनस्पति के उज्ज्वल पुष्पों के प्रकाश सदृश, उछलते उज्ज्वल यश से दिशाओं को भी प्रकाशमय बनाने वाले हे मुनीश्वर! आपश्री की जय हो! कलिकाल के फैले हुए प्रचण्ड अंधकार से नाश होते मोक्ष मार्ग के प्रकाशक प्रदीप रूप! महान् गुणों रूपी असामान्य श्रेष्ठ रत्नसमूह के निधान हे मुनीश्वर ! आप विजयी बनों! हे नाथ! रोग से पीड़ित देह के त्याग के लिए भी मेरा आगमन आपके चरण कमल के प्रभाव से आज निश्चय सफल हुआ है। इसलिए हे जगत् बन्धु! आज से आप ही एक मेरे माता, पिता, भाई और स्वजन हो, हे मुनीश्व

बारहखड़ी ऋ

 *🌞जिज्ञासा के मोती समाधान की चमक🌞* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 *🌞क्रमांक- 193* *4. आठों कर्मों का क्षय होने पर जीव किस गति से सिद्धशिला पर पहुँचता है ?* ▶️ऋजुगति *5. मनः पर्यवज्ञान के दो भेदों में से एक भेद ?* ▶️ऋजुमति *6. चार वेदों में से एक ?* ▶️ऋग्वेद *7. परमात्मा महावीर जी के प्रथम पिताजी का क्या नाम था ?* ▶️ऋषभदत्त जी *8. दादा गुरुदेव की पूजा के रचयिता कौन है ?* ▶️ऋद्धिसार यति जी *9. सबसे दीर्घ तप किस भगवान का चला ?* ▶️ऋषभदेव जी  *10. मध्यवर्ती 22 तीर्थंकरों के साधुओं की कौन-सी प्रकृति थी ?* ▶️ऋजुप्राज्ञ *11. चार शाश्वत विहरमान परमात्मा में से एक विहरमान का नाम ?* ▶️ऋषभानन जी *12. किस नदी के किनारे परमात्मा महावीर को केवलज्ञान हुआ था ?* ▶️ऋजुबालिका *13. विद्युन्माली देव ने देवलोक से च्यवकर किस सेठ के घर में जन्म लिया ?* ▶️ऋषभदत्त जी *14. कांकिणी रत्न से चक्रवर्ती किस पर्वत पर अपना नाम अंकित करते हैं ?* ▶️ऋषभकूट *15. वत्स विजय में कौन-से विहरमान विचरण कर रहे हैं ?* ▶️ऋषभानन स्वामी जी *16. जंबूस्वामी जी के पिताजी का नाम क्या था ?* ▶️ऋषभदत्त जी *17. चौबीस तीर्थंकरों में से एक, जो...