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जिनालय

नंदीश्वर द्वीप के 52 जिनालय आठवाँ नंदीश्वर द्वीप अतिरमणीय है । इस द्वीप में स्थान-स्थान पर पद्मवर वेदिका, सर्वरत्न के उत्पाद पर्वत, सुंदर बावडियाँ, बगीचे आदि है। बाबन जिनमंदिर -  इस द्वीप के चारों दिशाओं में अंजनरत्न के बने हुए अतिसुंदर 4 अंजनगिरि पर्वत है। एक-एक अंजनगिरि के चारों तरफ 4-4 गोलाकार वाली सुंदर बावडियाँ है। इन बावडियों के मध्य भाग में उल्टे प्याले के आकार वाले सफेद वर्ण के स्फटिक रत्न के दधिमुख पर्वत है। अर्थात् 4x4 = 16 दधिमुख पर्वत हुए। एक-एक दधिमुख पर्वत के दोनों तरफ एक - एक रतिकर पर्वत हैं। अर्थात् 16x2=32 रतिकर पर्वत हुए। 4 अंजनगिरि पर 4 शाश्वत जिनालय हैं। 16 दधिमुख पर्वत पर 16 शाश्वत जिनालय हैं। 32 रतिकर पर्वत पर 32 शाश्वत जिनालय हैं। कुल 52  शाश्वत जिनालय हैं। तीर्थंकरों के कल्याणक के दिनों में एवं शाश्वती अट्ठाईयों में चारों निकाय के देव नंदीश्वर द्वीप में अट्ठाई महोत्सव करते हैं तथा  नंदीश्वर द्वीप की चार विदिशा में 4-4 राजधानियाँ है। कुल 16 राजधानियों में 16 शाश्वत चैत्य है। ये राजधानियाँ 8 सौधर्मेन्द्र की पटरानियों की एवं 8 इशानेन्द्र की पटरानियों ...

स्मृति

1️⃣स्मृति के आधार पर किसने जैन आगम लिखें 🅰️देवर्द्धिगणी क्षमाश्रमण 2️⃣स्मृति, प्रत्यभिज्ञान, तर्क और अनुमान भी किसके ही रूप हैं मतिज्ञान 3️⃣स्मृतिभ्रंशरूप क्या है 🅰️याददाश्त काअंतर्धान होना, वह नाश होवे 4️⃣इस प्रकार गृहस्थ जीवन की पूर्व स्मृतियों को ताजी कर भवदत्त मुनि किस के मन को बहलाते हुए उस स्थान पर ले आए, जहाँ पर आचार्य भगवंत अपने शिष्य परिवार के साथ बिराजमान थे। 🅰️भवदेव जी 5️⃣अतीत काल की स्मृतियों से बचने के लिए किसको दृढ़ता से पकड़ना होगा। 🅰️वर्तमान 6️⃣जातिस्मृतिज्ञान उत्पन्न होने पर मृगापुत्र को पूर्व जन्म में किसका पालन किया था, उसकी स्मृति हो आई।* 🅰️मुनिधर्म 7️⃣दीर्घकाल तक स्मृति रहना । 🅰️ध्रुवग्राही 8️⃣समय व्यतीत होने पर भूल जाना। 🅰️अध्रुवग्राही 9️⃣क्रोध जनित कार्यों की स्मृति का उदय होने से खेद व खिन्नता की आग में जलना  क्या है 🅰️संज्वलन क्रोध है। 🔟जिसने अतीत की स्मृति से वर्तमान का बोध पाकर भविष्य को उज्ज्वल बनाया था। 🅰️आगमों में मेघ कुमार जी का वर्णन मिलता है, 1️⃣1️⃣पूर्वजन्म की स्मृति का कारण क्या होते हैं। 🅰️पूर्वकृत कर्म 1️⃣2️⃣जि...