संदेश

देव और देवलोक

  1️⃣- चारो जाति के देव जी के कुल कितने भेद हैं ? 🅰️- 198 भेद है । 2️⃣- देवताओं में शरीर कितने पाये जाते हैं ? 🅰️- तीन शरीर,वैक्रिय, तेजस,कार्मण। 3️⃣- देवताओं में अवगाहना कितने प्रकार की होती हैं ? 🅰️- दो प्रकार की,भवधारणीय,   वैक्रियकी अवगाहना । 4️⃣- देवताओं में संहनन कितने पाये जाते हैं ? 🅰️- छ संहनन में से एक भी नहीं पाया जाता हैं। 5️⃣- देवताओं में संस्थान कितने प्रकार का होता हैं ? 🅰️- एक समचतुरस्त्र संस्थान  । 7️⃣- देवताओं में कितनी कषायें पायी जाती हैं ? 🅰️- चारों  8️⃣- देवताओं में कितनी संज्ञाऐं पायी जाती हैं ? 🅰️ चारों । 9️⃣- देवताओं में कितनी लेश्याएं पायी जाती हैं ? 🅰️- छह । 1️⃣0️⃣- देवताओं में कितनी इंद्रियां पायी जाती हैं ? 🅰️- पांच  । 1️⃣1️⃣- देवताओं में कितनी दृष्टियां पायी जाती हैं ? 🅰️ तीन दृष्टियों पायी जाती हैं । 1️⃣2️⃣  देवताओं में कितने दर्शन पाये जाते हैं ? 🅰️ तीन दर्शन,चक्षु दर्शन, अचक्षु दर्शन,अवधि दर्शन।   1️⃣3️⃣ देवताओं में कितने ज्ञान पाये जाते हैं ? 🅰️- तीन ज्ञान,मतिज्ञान, श्रुतज्ञान,अवधिज्ञान।  1️⃣...

नरक और परमाधामी

  नरक में १५ परमाधामी की भयंकर वेदना १. अंब ५०० योजन उछाले २. अम्बरीष छुरे से टुकड़ा करें यष्टि-मुष्टि से प्रहार करें आंत - हृदय को फाड़े (मुद्री का प्रहार ४. सबल ३. श्याम ५. रौद्र भाला, बरछी से विंधे अनंत ता अनंत अनंत ९ ६. महारौद्र अंगोपांग छेदे ७. कालदेव उबलते तैल में डाले ८. महाकालदेव - मांस के टुकड़े खिलाते ६. असिपत्र तलवार से टुकड़ा करें १०. धनुष बाणों से नाक, कान विंधे ११. कुंभदेव कुंभीपाक में पकावे १२. बालुका तपी हुई रैती में भुजे १३. वैतरणी १४. खरस्वर तपे हुए सीसे में डाले काँटें वाले वृक्षों से रगड़े १५. महाघोष पशुओं के समान बाड़े में डाले नारकी की दस क्षेत्र वेदना परमाधामी-देवकृत वेदनाएं परमाधामी देव असुरकुमार देवों की एक जाति है। वह पन्द्रह प्रकार के होते हैं। दूसरों को दुःख देना और दुःखी देखकर प्रसन्न होना तथा आपस में लड़ना-भिड़ना और लड़ाई देखकर आनन्द का अनुभव करना इनका स्वभाव है। ये परमाधामी देव नारकी जीवों को इस प्रकार कष्ट पहुंचाते हैं :- (१) अम्ब-नारकी जीवों को आकाश में ले जाकर एकदम नीचे पटक देते हैं। (२) अम्बरीष-नारकी जीवों को छुरी वगैरह से छोटे-छोटे टुकड़े करके भा...

प्रवेश

 https://www.facebook.com/groups/3154432777929819/?ref=share ़ 📅 *༺꧁ नवकार  करे  भव  से  पार    ꧂༻*  *DSTE ~16   /12/2020* *🕰️समय  दोपहर  2.25 से 2.55۔* *🦚 💧🦜​टॉपिक -: 🦚🦚 🦚आपका शुभ प्रवेश ?*🦜🦜🦜 *🌹〰️🌹〰️🌹〰️🌹〰️🌹〰️🌹* 🦚🌼🌻🌹🦚🌼🌻🌹🦚🌼🌻🌹  टॉपिक - आपका शुभ प्रवेश   १. किसका पृथ्वीपर का भूगर्भ प्रवेश कल्याणकारी कहा जाता है ? उ १. तीर्थंकर ! २. गृहस्थाश्रम के प्रवेश द्वार के नजदिक आकार वापस कौन लौते? उ २. नेमीकुमार  ३. किसके स्वयं कि तेजोलेशया ने स्वयं मे ही प्रवेश किया था ? उ ३. गौशालक ४. दुसरे राज्य में प्रवेश करते हैं तब मोबाईल में क्या लगता हैं ? उ ४. रोमिंग  ५. आजकल स्कूल में प्रवेश करने के लिए क्या देना पडता हैं ? उ ५. डोनेशन ६. राजपद में प्रवेश लेते समय ही वनमें प्रवेश किसने किया ? उ ६ श्रीराम ७. कहाँ प्रवेश करणे पर सभी प्रकार के वैर भाव भूल जाते हैं ? उ ७. समवसरण में  ८. जंबुकुमार के घर चोरी करणे के लिए किसने प्रवेश किया था ? उ ८. प्रभवचोर ९ . दर्शन श्रावक रूप चतुर्थ गुणस्थान ...

नगरी पहचानो?

  ⚜ 1️⃣ *कौनसी नगरी मे हर दिन सवा सेर केसर आता था*❓ *चंद्रावती* 2️⃣ *कौनसी नगरी मे सबसे पहले कल्पसूत्र की वाचना हुई*❓ *आनंद पुर* 3️⃣ *कौनसी नगरी लाढ देश की राजधानी है*❓ *कोटीवर्ष* 4️⃣ *कौनसी नगरी की महावीर स्वामी ने प्रशंसा की*❓ *तुंगिया नगरी* 5️⃣ *कौनसी नगरी मे आदिनाथ जी ने प्रथम पारणा किया*❓ *हस्तिनापुर* 6️⃣ *कौनसी नगरी में पांडवों ने अज्ञातवास बिताया*❓ *विराट नगरी* 7️⃣ *कौनसी नगरी मे नेमीनाथ जी का पारणा हुआ*❓ *वीरपुर* 8️⃣ *कौनसी नगरी मे छः महिने अग्नि जलती रही*❓ *द्वारिका नगरी* 9️⃣ *कौनसी नगरी मे रावण पार्श्वनाथ जी की मूर्ति है*❓ *अलवर* 🔟 *कौनसी नगरी मे तामली तापस जी राजधानी के इंद्र बने*❓ *बलीचंचा* 1️⃣1️⃣ *किस नगरी मे महावीर स्वामी वासुदेव बने*❓ *पोतानपुर* 1️⃣2️⃣ *कौनसी नगरी में अभयदेव सुरी जी का स्वर्गवास हुआ*❓ *कपड़वंज* 1️⃣3️⃣ *किस नगरी के इलायची कुमार जी रहने वाले*❓ *ईलावर्धन* 1️⃣4️⃣ *कौनसी नगरी के चंडप्रद्योत जी राजा थे*❓ *उज्जयिनी* 1️⃣5️⃣ *कौनसी नगरी मे नौ लाख क्षत्रिय बसते थे*❓ *लाहौर* 1️⃣6️⃣ *कौनसी नगरी मे वासुपूज्य जी के पांच कल्याणक हुए*❓ *चंपानगरी* 1️⃣7️⃣ *कौनसी नगरी ...

जैन सम्मत वास्तु

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  *जैन सम्मत वास्तु* *भूमि परीक्षा* चउवीसंगुलभूमी खणेवि पूरिज्ज पुण वि सा गत्ता। तेणेव मट्टियाए हीणाहियसमफला नेया।।३।। मकान आदि बनाने की भूमि में २४ अंगुल गहरा खड्डा खोदकर निकली हुई मिट्टी से फिर उसकी खड्डे को पूरे। यदि मिट्टी कम हो जाय, खड्डा पूरा भरे नहीं तो हीन फल, बढ़ जाय तो उत्तम और बराबर हो जाय तो समान फल जानना।।३।। *अह सा भरिय जलेण य* *चरणसयं गच्छमाण जा सुसइ*। *ति–दु—इग अंगुल भूमी अहम मज्झम उत्तमा जाण*।।४।।* " अथवा उसी ही २४ अंगुल के खड्डे में बराबर पूर्ण जल भरे, पीछे एक सौ कदम दूर जाकर और वापिस लौटकर उसी ही जलपूर्ण खड्डे को देखे। यदि खड्डे में तीन अंगुल पानी सूख जाय तो अधम, दो अंगुल सूख जाय तो मध्यम और एक अंगुल पानी सूख जाय तो उत्तम भूमि समझना।४।। *अंजुगोलछा* *वास्तु जैन सम्मत* *भूमि* पर्णानुकूल भूमि— सयविप्पि अरुणखत्तिणि पीयवइसी अ कसिणसुद्दी अ। भट्टियवण्णपमाणा भूमी निय निय वण्णसुक्खयरी।।५।। सफेद वर्ण की भूमि ब्राह्मणों को, लाल वर्ण की भूमि क्षत्रियों को, पीले वर्ण की भूमि वैश्यों को और काले वर्ण की भूमि शूद्रों को, इस प्रकार अपने अपने वर्ण के सदृश रङ्गवाली भूमि सुखकारक हो...

नमुत्थुणं 2

*                         *शक्रस्तव*                       ~~~~~~~~ महान सूत्र, *नमुऽत्थु णं* का विशेष विवेचन...                              (87) *धम्म-सारहीणं-3*-चारित्रधर्म के सारथी ऐसे परमात्मा को मेरा नमस्कार हो। अरिहंत परमात्मा चारित्रधर्म का प्रवर्तन, पालन और दमन किस तरह करते हैं ये पिछले लेखों में हमने समझा। इस तरह के प्रवर्तन, पालन और दमन योग से ही परमात्मा धर्म के सारथी कहलाते हैं। वैसे दूसरी आत्माएं भी चारित्रधर्म का प्रवर्तन, पालन और दमन तो करते ही हैं, फिर भी धर्म के सारथी तो तीर्थंकर ही कहलाते है। क्योंकि वो स्वयं तो चारित्रधर्म में प्रवृत है ही, साथ ही अन्य को निमित्तभाव से प्रवृत्त करते हैं और अनेक आत्माएं भगवान के वचन के आधार से ही चारित्र धर्म मे प्रवृत्त है। धर्मरथ के श्रेष्ठ सारथि परमात्मा को प्रणाम करते हुए प्रार्थना करते हैं कि, हे नाथ!!!!आप हमारे भी धर्मरथ के सारथि बन कर हमको म...