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आयंबिल

  टॉपिक; *आयंबिल*  1️⃣पुष्पचुलिका सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ?  🅰️  7.आयम्बिल । 2️⃣ वृष्णिदशासूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 7 आयम्बिल । 3️⃣नंदीसूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 3 आयम्बिल । 4️⃣ अनुयोगद्वार सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 8 आयम्बिल । 5️⃣ उत्तराध्ययन सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 29 आयम्बिल । 6️⃣ दशवैकालिक सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 15 आयम्बिल । 7️⃣ निशीथ सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ?  🅰️10 आयम्बिल ।  8️⃣दशाश्रुतस्कंध सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ? 🅰️ 20 आयम्बिल । 9️⃣ बृहत्कल्प सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए ?  🅰️20 आयम्बिल । 🔟 व्यवहार सूत्र का अध्ययन करने पर कितने आयम्बिल करने चाहिए?  🅰️20 आयम्बिल । ☄1) दशवैकालिक सुत्र का अध्ययन करने पर कितने आयंबिल  करना चाहिए❓ 🅰 15 आयंबिल ☄2) आयंबिल तप के साथ नवांगी टिका किसने बनाई❓ 🅰 अभयदेवसुरिज...

देव गति पूरी3

नौ ही जातियों के देवों की आयु जघन्य  कितनेवर्ष की जघन्य १०,००० नौ ही इन्द्रों की कितनी परिषद हैं 3-3  विद्युत्कुमार के दक्षिण-विभाग के इन्द्र कौन हैं इन्द्र हरिकांत हैं दसवें अन्तर में कौन रहते हैं स्तनित कुमार * दूसरे नागकुमार से लेकर दसवें स्तनितकुमार तक को क्या कहते हैं  नवनिकाय (नौ जाति) के देव कहते हैं।  सुवर्णकुमार के दक्षिण-विभाग में इनके भवन हैं  ३८ लाख भवन हैं  इन्द्र अग्निशिखेन्द्र किस  जाति के देव हैं अग्निकुमार * जाति के बाह्य परिषद् में कितनी देवियां हैं। १२५ प्रत्येक इन्द्राणी का कितने हजार का परिवार है  पांच-पांच हजार मध्यपरिषद् में कितने देव हैं  ७०,०००

जैन रामायण 3

 U 🏹 *जैन रामायण * 🏹 ✏रचयिता :- श्री हेमचंद्राचार्य जी ✏भाषांतर :- मुनिश्री रैवतचंद्रविजयजी 17-03-2021 ( 100 ) गतांक से आगे : यहाँ पर भी संसार की विचित्रता का चित्रण सामने आया है । अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए श्रुतिरति ने कुलंकर राजा को दीक्षा लेते रोका , तो कुलंकर की पत्नी ने अपने विषयवासना की पूर्ति में विघ्नकर राजा को विष देकर मार दिया । वेद पढ़े पर वेदोदय को न समझे हुए रमण ने रात को बिना विचारे परस्त्री समझकर बड़े भाई की पत्नी से क्रीड़ा की । कभी-कभी उग्र पाप का फल उग्र परंतु शीघ्र मिल जाता है । रमण को पाप का फल मृत्यु के रुप में मिल गया और मेरे पाप का पता पति को लग गया है तो ऐसे पति की क्या आवश्यकता है ऐसा सोचकर विनोद की पत्नी ने विनोद को भी मार दिया । यही तो संसार की स्वार्थ लीला हैं । उन दोनों ने चिर समय तक संसार में भ्रमण किया । विनोद का जीव धन नामक श्रेष्ठी हुआ और रमण का जीव धन का पुत्र भूषण हुआ । धन की आज्ञा से बत्तीस कन्याओं के साथ विवाह किया । उनके साथ क्रीड़ा करते हुए उसने एक दिन रात के चौथे प्रहर में श्रीधर मुनि को केवलज्ञान उत्पन्न होने पर , देवों के द्वारा आरंभ ...

नमुत्थुणं (25 बोल ) क्लास का5

 *1:3:21* *अध्याय* *लोक और अलोक* हम 4 गति जानने से पहले इस लोक को समझे लोक शब्द 'लुक्' धातु से बना है। लोक्यते इति लोकः, अर्थात् आकाश के जिस भाग में धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय आदि द्रव्य दिखाई देते हैं, वह लोक कहलाता है। इसके विपरीत जहां आकाश के अतिरिक्त और कोई भी द्रव्य दिखाई नहीं देता-शुद्ध आकाश ही आकाश है वह अलोकाकाश है। सर्वज्ञ भगवान् से अवलोकित यह लोक आदि—अन्त से रहित, स्वभाव से ही उत्पन्न और जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश तथा काल इन छहों द्रव्यों से भरा हुआ है। यह अनन्तानन्त अलोकाकाश के बीचों बीच में है।  अलोक अनंतानन्त अपरम्पार अखण्ड तक अमूर्तिक आकाशातिकाय मय है। जैसे किसी विशाल स्थान के मध्य में छींका लटका हो, उसी प्रकार - मध्य में लोक है। विवाह प्रजापति ( भगवती) सूत्र में कहा है कि जैसे जमीन पर एक दीपक  उलटा रख कर उसके ऊपर दूसरा दीपक सीधा रख दिया जाए और उस पर तीसरा दीपक फिर उलटा रख दिया जाए तो जैसा आकार बनता है, वैसा ही आकार लोक का है। यह लोक नीचे सात राजू चौड़ा है।  आइये पहले परिमाण जानें ताकि आगे समझने में आसानी होगी *राजू का अर्थ* - राजू का परिमाण-३, ८१,...