संदेश

मनुष्य गतिपूरा

स्त्रीवेद, पुरुषवेद एवं नपुंसकवेद की आगति एवं गति लिखिए। उ. स्त्रीवेद की आगति 371 की (समुच्चय जीववत् 563 में से 7 नारकी, 86 युगलिक मनुष्य और 99 जाति के देवता, इन 192 के अपर्याप्त को छोड़कर शेष 371 की ) । गति-561 की (सातवीं नरक का अपर्याप्त पर्याप्त छोड़कर) पुरुषवेद की आगति 371 की (समुच्चय जीववत्)। गति-563 की । नपुंसकवेद की आगति 285 की (179 की लड़, 99 जाति के देवता और सात नरक के पर्याप्त) मुक्ति का दरवाजा जहा खोल बन्ध होता वे क्षेत्र के पर्याप्त मनुष्य के भेद कितने*❓ 💚🅰 *15 -10** 15 कर्मभूमिज सन्नी मनुष्य की आगति एवं गति लिखिए। उ. 15 कर्मभूमिज सन्नी मनुष्य की आगति 276 की- ( 99 जाति के देवता, पहली से छठी तक ये छः नरक, एवं 179 की लड़ में से तेउकाय, वायुकाय के 8 भेद छोड़कर 171 की, इस प्रकार 171+99+6=276) 15 कर्मभूमिज सन्नी मनुष्य की गति 563 की। (g) देवकुरु-उत्तरकुरु के युगलिक आयुष्य पूर्ण कर कहाँ उत्पन्न होते हैं ? उ. पहले किल्विषी तक (भवनपति, वाणव्यन्तर ज्योतिषी पहला, दूसरा देवलोक तथा पहला किल्विषी में) कौन से भगवान के तीर्थ में हरिवंश कुल की उत्पत्ति हुई। 🅰️ श्री शीतलनाथ जी भरत क्षेत...

84 की संख्या

 🙏🌹🙏 84 की संख्या का जैन शासन में महत्व ..... आमतोर पर 84 की संख्या को 84 लाख योनि की भव - भ्रमणा रुप जाना जाता है । आइये जानें विभिन्न जैन मान्यताओं के आधार पर संख्या 84 का कहाँ-कहाँ किस रुप में वर्णन आया हुआ है । कतिपय कुछ उदाहरणः 01.  84 लाख पूर्व वर्ष की आयु भगवान ऋषभदेव जी की 02.  84 गणधर भगवान ऋषभदेव जी के 03.  84 गण भगवान ऋषभदेव जी के 04.  84 हजार साधु भगवान ऋषभदेव जी के 05.  84 लाख वर्ष की आयु 11वें प्रभु भगवान श्रेयांसनाथ जी की 06.  84 हजार साधु भगवान श्रेयांसनाथ जी के 07.  84 हजार वर्ष की आयु 18वें प्रभु भगवान अरनाथ जी की 08.  84 हजार लगभग वर्ष, भगवान अरिष्टनेमि जी (नेमिनाथ जी) के बाद महावीर स्वामी हुये । 09.  84 लाख पूर्व वर्ष की आयु अरिहंत प्रभु जी (विहरमान प्रभु जी) की 10.  84 सौ वादी (वादलब्धि वाले) 7वें प्रभु जी सुपार्श्वनाथ जी के (प्रवचनद्वार अनुसार) 11.  84 सौ अवधिज्ञानी 9वें प्रभु जी सुविधिनाथ जी के 12.  84 लाख मंत्रों की उत्पत्ति हुई नवकार मंत्र से 13.  84 हजार वर्ष झाझेरा का भरतक्षेत्र व ऐरावत क...

दास दासियां

 *1 मई मजदूर दिवस है*  *तो आज हमारी क्लास भी*  *दास दासियां पर स्पेशल है।* *Topic :-दास दासियां* 1️⃣ आपके अंतःपुर में *सैरन्ध्री* नामकी दासी है , वह हमारी पत्नी द्रौपदी है । किसने किससे कहा?  🅰️ अर्जुन जी ने ,राजा  वृहन्नट से कहा 2️⃣पन्ना धाय ने किसको बचाने के लिये अपने पुत्र चन्दन  को कुर्बान कर दी 🅰️उदयसिंह जी 3️⃣उदयान राजा की रुपवती दासी का नाम ❗ 🅰️स्वर्ण गुलिका 4️⃣बहुला दासी ने विरजी को कौनसे तप का पारना कराया❓ 🅰भद्रतप☘ 5️⃣एक दासी जो   सलीम की  प्रियतमा बनी 🅰️अनारकली 6️⃣एक दासी जो भारत की मुगलसम्राज्ञी  बनी 🅰️नूरजहाँ 7️⃣कोई भी महिला मंदिर में खुद को समर्पित करके देवता की सेवा करती थीं। देवता को खुश करने के लिए मंदिरों में नाचती थीं। उसे क्या कहते है 🅰️देव दासी 8️⃣भारत का एक प्रसिद्ध वंश 🅰️गुलाम वंश 9️⃣एक गुलाम वंश की  शासिका 🅰️रजिया सुल्ताना 🔟चक्रवर्ती के दास दासी कितनी होती है 🅰️99 करोड़ 1️⃣1️⃣चित सम्भूति 5 भव में किसकी कुक्षी में उत्पन्न हुए 🅰️शांडिल्य ब्राह्मण की दासी यशोमति की कुक्षि से उतपन्न होते है। युगल रूप मे...

नमुत्थुणं (25 बोल ) क्लास का6

 30:4:21 निगोद के एक गोले के जीवो की तथा एक गोले से दूसरे गोले की समानता जैसेे…… अस्तित्त्व सत्ताकी समानता जन्म की समानता सुख की समानता शरीर की समानता आहार की समानता पानी की समानता श्वासोश्चास की समानता इंद्रिय की समानता संवेदना की समानता आयुष्यकर्म की समानता मिथ्यात्व मोहनीयकर्म की समानता निगोद के गोले में जीव है अतः इतनी सारी क्रियाएं होती है। एक ही शरीर में अनंता जीवों को साथ रहना है, अतः इतनी सारी समानता होती है। । ८४ के चक्कर में चार गति में कोई भी जीव, कहीं भी स्थिर- स्थाई रह नहीं सकता है। आयुष्य कर्म पूर्ण करके शरीर छोड़कर जीव दूसरी गति में चला जाता है उसी का नाम है मृत्यु। नवकार गिने बिना अथवा सुने बिना जीव चला न जाए, उसकी तैयारी आज से ही कर लेनी चाहिए।  ९ महीने तक प्रसव की पीड़ा सहन करने वाली माँ का उपकार हम चुका नहीं सकते हैे , तो अनंत काल तक निगोद के काले गर्भ से जन्म देनेवाले सिद्धात्मा का ऋण कैसे चूका पाएंगे? ऋण चूकाने हेतु “णमो सिद्धांणं “ का जप करना अनिवार्य  आवश्यक है । जिससे हम भी कर्ममुक्त होकर सिद्ध बन सके। मां-बाप का उपकार स्मरण करके उनकी आज्ञा का पालन...