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सती मदनरेखा

भारतवर्ष में. सुदर्शनपुर नाम क प नगर था। सुदर्शनपुर के राजा का नाम था, मणिरथ | मणिरथ, न्याय नीती कुशल और क्षत्रियोचित गुण सम्पन्न था । मणिरथ के छोटे भाई का नाम युगबाटु था। युगबाट की तरह वीर और फला कुशल होने के साथ ही, विनम्र भी था | जिसकी यह कथा है, वह सती मयणरहा या मदनरेगा युगबाट की धर्मपत्नी थी । मणिरय और युगयाट्ट दोनों भाइयों में, परम्पर पूर्ण स्नेट या। मणिरथ, अपने छोटे भाई युगबाहु को पुत्र की तरह मानता उस पर पूर्ण विश्वास रखता और उसकी सुविधा का भो समुचित रूपेण ध्यान रखता । इसी प्रकार युगबाहु भी, अपने बड़े भाई! को अपने पिता के समान आदरणीय मानता, उसकी इच्छा विरुद्ध कोई कार्य न करता, तन मन से उसकी सेवा करता, उसके प्रति विनम्र एवं आज्ञाकारी रहता और अपने हृदय में, स्वप्न में भी उसके प्रति दुर्भाव न देता तात्पर्य यह कि दोनों भाइयों में आदर्श स्नेह था। दोनों, दो देह एक आत्मा के समान रहते थे । एक दिन मणिरथ ने विचार किया कि मेरा भाई युगबाहु वीर, विनम्र, न्याय नीति कुशल और मेरा पूर्ण भक्त है । वह मेरा उत्तराधिकारी होने के सर्वथा योग्य है। इसलिए यही अच्छा होगा कि मैं युगबाहु को युवराज पद देकर...

क्षमा

1️⃣मैं सब जीवों सेक्षमा चाहता हूँ। ये किसने कहा था 🔼भगवान महावीर ने 2️⃣क्षमा को किसकी उपमा दी है ? 🔼- क्षमा को शीतल जल की उपमा दी गई है । 3️⃣क्षमा धारण करने में सबसे अधिक कौन से तीर्थंकर प्रसिद्ध हुए हैं ? ,🅰️- तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ 4️⃣रामायण मेंकपिल ब्राह्मण को किसने क्षमा किया  🅰️रामचंद्र जी ने 5️⃣क्षमा ~~ करता है, मुक्त ~~ लोग होते हैं।   🅰️एक/दो। 6️⃣गुरु से क्षमा मांगने के लिए कौनसा सूत्र है?? 🅰️ अब्भुट्ठिओ!! 7️⃣ क्षमा की माता कौन 🅰️अंहिसा 8️⃣पार्श्व नाथ जी ने किस राजा को माफ किया 🅰️यवन  राज को 9️⃣देवर्धि गणि क्षमा श्रमण जी का दुसरा नाम क्या है ?* *🅰️देव वाचक जी  🔟 वैर प्रश्र चिन्ह है तो क्षमा क्या है!!  🅰️पूर्ण विराम। 1️⃣1️⃣श्राप के भय से किस राजा ने क्षमा मांगी❓ 🅰 संयति राजा❗ 1️⃣2️⃣ श्री ठाणांग सूत्र मैं क्षमा का पर्याय वाची शब्द कौन सा है❓ 🅰 खंती❗ 1️⃣3️⃣आयरिय उवज्झाए सूत्❗किस लिए है 🅰️सकलसंघ से क्षमापना करने का सूत्र  1️⃣4️⃣क्षमा मांगने आये भाई की हत्या किसने की 🅰️कमठ ने 1️⃣5️⃣ वैर का परिणाम कितना खतरनाक है यह समझने के लिए ...

क्षमा

🪔🪔🪔 *📝टाँपिक 👉  क्षमा का गुण सर्वश्रेष्ठ गुण   ✍️ !* 👑👑👑  करते हैं आपको प्रणाम सा 🙏🙏*  *🙏🌹जय जिनेन्द्र सा 🌹🙏* यति धर्म  में प्रथम  क्षमा 🅿️1️⃣ पर्युषण महापर्व का प्राण क्या है❓ 🅰1️⃣ क्षमापना❗ 🅿2⃣ श्री ठाणांग सूत्र मैं क्षमा का पर्याय वाची शब्द कौन सा है❓ 🅰2️⃣ खंती❗ 🅿3⃣ क्षमा मार्दव आर्जव क्या है❓ 🅰3️⃣ यति धर्म❗ 🅿4⃣ किस श्रावक ने अपनी पत्नी से क्षमा मांगी❓ 🅰4️⃣ महाशतक जी ने अपनी पत्नी रेवती से❗ 🅿5⃣ श्राप के भय से किस राजा ने क्षमा मांगी❓ 🅰5️⃣ संयति राजा❗ 🅿6⃣ किस परिव्राजक ने किस श्राविकि से क्षमा मांगी❓ 🅰6️⃣ अंबड जी ने सुलसाजीसे❗ 🅿7⃣ किस राजा के जैसी क्षमापना करनी चाहिए जिसने जीता हुआ राज्य भी लौटा दिया❓ 🅰7️⃣ उदायन राजा❗ 🅿8⃣ कौन से श्रावक से गौतम स्वामी ने क्षमा मांगी❓ 🅰8️⃣ आनंद श्रावक से❗ 🅿9⃣ किस माता ने अपने पांचों पुत्रों के हत्यारे को क्षमा कर दिया था❓ 🅰9️⃣ द्रौपदी❗ 🅿1⃣0⃣ हे देवी! तू पतिव्रता है! मेरी भूल क्षमा करो!!! किसने किससे कहा❓ 🅰1️⃣0️⃣ पवनंजय जी ने अंजना सतिजी से कहा❗ 🅿1⃣1⃣ शिष्या से माफी मांगने वाली गुरुणी ...

नव पुण्य

  यह नौ पुण्य क्रमशः पुण्यानुबंधी पुण्य के कारण है और आत्मा के विकास की प्रारंभिक अवस्था है। नवपद यह आत्मा के विकास का शिखर है, उस शिखर पर पहुंचने के लिए नवपद के ही अंशरूप इन नौ पुण्यो में प्रव्रत्ति करनी चाहिए, ऐसी परमात्मा की आज्ञा है। इन सभी पुण्य का पात्र में सदुपयोग करने से किस प्रकार 18 पापों की शुद्धि होती है, उसका संक्षेप से सापेक्ष रूप से इस प्रकार विचार कर सकते हैं। (1) अन्न पुण्य:- प्राणों को धारण करने में अन्न की अत्यंत जरूरत है। अन्न के बिना लंबा जीवन नहीं जिया जा सकता है। इतना ही नहीं परंतु अन्न का दान करने से जीवनदान दिया ऐसा माना जाता है। अन्न यह दुनिया में प्राण रूप है। 1) अन्न देने के द्वारा अन्य जीवो के प्राण धारण में सहायक बनने से हिंसा-पाप की शुद्धि होती है, हिंसाजन्य पाप का नाश होता है। 2) अन्न द्वारा दूसरों को प्राण देने वाला व्यक्ति मृषावाद करते हुए दूसरे जीव को दु:खी नहीं कर सकता, दूसरे जीवो के प्रति दया की सच्ची लगन प्रकट होने पर किसी जीव को दिल से ठेस पहुंचे ऐसे कठोर या असत्य वचन का प्रयोग करने का भी अपने आप बंद हो जाता है, इस प्रकार अन्न पुण्य से प्रथम क...

कयवन्ना

  कयवन्ना( कृतपुण्यक शेठ)और माया का अपूर्व चमत्कार  प्रथम प्रकरण पूर्व देश में राजग्रही नगरी थी। जिसमें धनदत्त नामक शेठ रहता था जिसके कोई पुत्र नहीं था। भाग्यवश प्रौढ़ावस्था में उसके एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम कयवन्ना रखा गया था। जिसके लक्षण ओर चेष्टा से यह पाया जाता था कि वह विवेक विद्या और नीति में निपूण होगा। प्रकृति का, यह सदा नियम है कि आत्मा जिस २ गृह (काया) में रहता है और जैसे २ कर्तव्य करता है उसी अनुसार पुनर्जन्म में वे ही अनुभव दूसरे गृह में प्रवेश करते समय साथ चले जाते हैं । इसलिये बहुत से मनुष्य जन्म से दुष्ठता की तरफ झुकते जाते हैं। और बहुत से भक्ति नीति-और देश सेवा की तरफ अपना लक्ष खिंचते रहते हैं ।  इसी नियमानुसार कयवन्ना बालवय से ही नीति ओर वैराग्य की तरफ झुका हुआ था और वह मात्र अभ्यास, शुभ भावना, और वैराग्य में ही आनन्द मानता था । धनवानों का पुत्र होने पर भी कनक कामिनी की, ओर का प्रेम तनिक मात्र भी न था। उसका मन यहां तक भद्रिक था कि वह अपनी देवांगना समान स्त्री की तरफ तिरछी नजर से भी नहीं देखता था और न उसकी स्त्री के हाव भाव और श्रृंगार भी उसके मन को ...

नायक या खलनायक

  *♈10) एक श्रेष्ठ पुरुष था, नायक नही खलनायक था ।* *सती का हरण किया था, मरकर नरक में गया था ?* *Answer :- रा 🏹!* रावण *Topic -::- नायक या खलनायक* उदयन राजा के जीवन के खलनायक विनयरत्न मुनि , चंडप्रद्योत जी पहले भव मे तुमने  मुझे सताया 9 भव मैंने मारा 1️⃣ *कुमारपाल राजा जी के जीवन में कौन खलनायक बनें*❓ 🅰️ *अजयपाल जी* 2️⃣ *वसुमति जी के जीवन की खलनायिका कौन थी*❓ 🅰️ *मूला सेठानी जी* 3️⃣ *श्रेणिक राजा जी के जीवन के नायक कौन बनें*❓ 🅰️ *अनाथि मुनि जी* मैंने अपनी पत्नि को मारा अर्जुन माली , बंधुमति जी बेटा होकर होकर दुश्मन बना कोणिक जी जँवाई को मार डालने वाला सौमिल जी 4️⃣ *पांच पांडव जी के जीवन के खलनायक कौन बनें*❓ 🅰️ *कौरव जी* भाई - भाई का दुश्मन हाथी हार के कारण कोणिक ,हल्ल विहल्ल 5️⃣ *अजयपाल जी किस की जिंदगी में खलनायक बनें*❓®️ 🅰️ *कपर्दी मंत्री जी* 6️⃣ *श्रीपाल राजा जी के जीवन में खलनायक का किरदार किसने निभाया*❓ 🅰️ *धवल सेठ जी* 7️⃣ *देवानंदा जी के जीवन में खलनायक कौन थे*❓ 🅰️ *स्वयं - पूर्व भव‌ के कर्म* 8️⃣ *सुंदरी जी के जीवन में खलनायक बनते बनते नायक कौन बना*❓ 🅰️ *भरत चक्र...