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तत्वार्थ सूत्र प्रश्नोत्तरी

 तत्वार्थ सूत्र प्र.१. जीव के असाधारण भाव (स्वतत्व) के नाम बताओ ? उत्तर— १. औपशमिक, २. क्षायिक, ३.मिश्र, ४. औदयिक और पारिणामिक ये ५ भाव जीव के स्वतत्व अथवा असाधारण भाव है। प्र.२. औपशमिक भाव से क्या आशय है ? उत्तर— कर्मों के उपशम से आत्मा का होने वाला भाव औपशमिक भाव है। प्र.३. क्षायिक भाव किसे कहते हैं ? उत्तर— कर्मों के क्षय से जो भाव होता है वह क्षायिक भाव है। प्र.४. मिश्र भाव किसे कहते हैं ? उत्तर— कर्मों के क्षयोपशम से जो भाव होता है वह क्षयोपशमिक भाव कहलाता है। प्र.५. औदयिक भाव किसे कहते हैं ? उत्तर— कर्मों के उदय से जो भाव होते हैं उसे औदयिक भाव कहते है । प्र.६. पारिणामिक भाव किसे कहते हैं ? उत्तर— जो भाव कर्मों के उपशम, क्षय, क्षयोपशम और उदय की अपेक्षा न रखते हुए आत्मा का स्वभाव मात्र हो उसे पारिणामिक भाव कहते है । प्र.७. सम्यग्दृष्टि और मिथ्यादृष्टि के कौन—कौन से भाव होते है ? उत्तर— (१) सम्यग्दृष्टि के क्षायिक और औपशमिक भाव होते है। (२) मिथ्यादृष्टि जीव के क्षायोपशमिक (मिश्र), औदयिक और पारिणामिक भाव होते है। प्र.८. भाव का क्या अर्थ है और इनका जीव के साथ क्या संबंध है ? उत्त...

*पर्वाधिराज पर्युषण* कविता

*पर्वाधिराज पर्युषण* पर्युषण आया, लाया आत्मिक प्रसंग, छोड़ो जगत के सारे झुढे प्रपंच, विस्मृत आत्मा की भी सुध लो  कर्मों से ठान लो अब जंग। पर्व नहीं, यह आत्म-उत्सव है, आत्म-शुद्धि का ही वैभव है, पर्वों में सबसे ऊँचा यही, पर्वाधिराज का गौरव  सही। महावीर ने पाँच कर्तव्य बताए, जो आत्मा को मुक्ति तक ले जाए - *पर्वाधिराज के पाँच दीप* भव सागर के सुंदर सीप *1. अमारि प्रवर्तन - अहिंसा का दीप* पहला कर्तव्य है अमारि प्रवर्तन, अहिंसा का सच्चा आवर्तन। स्वयं जियो, औरों को जीने दो, हर जीव को अभय का वर दो। जहाँ हिंसा है, वहाँ धर्म नहीं, जहाँ भय है, वहाँ मर्म नहीं। इसलिए पर्युषण में सबसे पहले, अहिंसा का दीप जलाना है, कर ईर्या  समिति जीव बचाने है जीवों को अभय दिलाना है। *2. साधर्मिक वात्सल्य - प्रेम का दीप* दूसरा दीप है वात्सल्य अपार, साधर्मिक ही सच्चा परिवार। जगत के नाते तो स्वार्थ के हैं, पर साधर्मिक नाते परमार्थ के हैं। जिसके हृदय में धर्म बसा है, वही तो अपना सगा है। उसे वस्त्र दो, पात्र दो, सम्मान दो, धर्मी को अपना कर, धर्म को मान दो। एक साधर्मिक को अपनाने से, साक्षात धर्म अपनाया जाता ...

क्षमा पर कविता

क्षमा वशीकरण मंत्र है। दुश्मनी  को  खत्म करने का तंत्र हैं  विशष्ट  बात इसकी क्षमा वीरोचित है गलती तो,होती हैं सभी से,  माफ करना  ही उचित हैं कहना यह कँहा अतिश्योक्ति हैं क्षमावानों के लिए यह लोक है।  क्षमावानों के लिए ही परलोक है।  क्षमाशील का इस जगत में सम्मान और  उनके लिये परलोक में उच्च गति है क्षमा से बढ़कर और किसी भी बात में नहीं पाप को पुण्य बनाने की शक्ति  है। यह  ही सर्वोचयुक्ति हैं। मांगती हूँ पहली क्षमा अपनी श्वेत आकीर्ण आत्मा से  जिसकी  शुचिता को भर दिया कर्मो के किलिष्ट  अमिट  दाग से मांगती हूँ दूसरी क्षमा   अपने मानस से, जिसे रखा महरुम आध्यात्मिकता के पोषक तत्व से  क्षमा याचना हे परमेश्वर ! तुम्हें अक्सर जाती हूं भूल। कांटों के बाजार में बैठ फिर भी चाहती हूं फूल। क्षमा याचना आप सभी से कभी कटु वचन जो बोले। अल्पमति हूं ,दुरबुद्धी हूं, मैंने बोल नहीं कभी तोले। इन्सान हूं भगवान नहीं हूं यही समझ क्षमा मुझे करना। देना ये वरदान आ जाए सबको अपनाना। अंजू गोलछा *पर्युषण की पूर्व संध्या पर* *सभी स...

जज साहब का सम्मान

श्रीमान् गौतम जी चोरड़िया के सम्मान में दिली उद्‌गार मुस्कराया हर चेहरा, हर ओर खुशी सी छगई है, मेहनत और सहजता से पायी सफलता । आपको तहे दिल से बधाई है..... लक्ष्यपूर्ण जीवन आपका, पल-पल का महत्व जाना है, धर्मनिष्ठ बन, आपने अपना कर्तव्य निभाया है। ये आपके उन्नत संस्कारो की अरुणाई है।। आपको तहे सहज स्वभाव आपका, बड़प्पन छूना पाया है। झुककर मिले सब से, पद की गरिमा को बढ़ाया है। सबको लुभाती आपकी ये नरमाई है। आपको तहे दिल सज्जनता की प्रति मूर्ति, मिलनसार भावों की सुकृति। आपको पाकर धन्य हुई प्रकृति, आप हो उन्नत भावो की आकृति। अपनहीं वरा सप्नता को, वरन सफलता आपको वर इठलाई है।। आपको तहे दिल... तेरा पंथ के सशक्त हस्ताक्षर, आपके साथ रहने का मिला हमें सुअवसर, ये सम्मान आपका है, और सम्मानित हम हो रहे हैं, यह आपके अमिट व्यक्त्वि की गहराई है। आपको तहे दिल से बधाई सदैव रहो यूं ही मुस्कुराते, सफलता आपके कदम चूमे, एक दिन भारत के सशक्त हस्ताक्षर बन उभरों, और गर्व से हम कहे चौरडियाजी, वो तो हमारे अपने है, यह ही अपनत्व हमें भरमाई है। आपको तहे दिल से बधाई है ये उपरोक्त कही बात वो अतिश्योक्ति नहीं वरन कहूं तो,...