क्षमा पर कविता
क्षमा वशीकरण मंत्र है।
दुश्मनी को खत्म करने का तंत्र हैं
विशष्ट बात इसकी क्षमा वीरोचित है
गलती तो,होती हैं सभी से, माफ करना ही उचित हैं
कहना यह कँहा अतिश्योक्ति हैं
क्षमावानों के लिए यह लोक है।
क्षमावानों के लिए ही परलोक है।
क्षमाशील का इस जगत में सम्मान और उनके लिये परलोक में उच्च गति है
क्षमा से बढ़कर और किसी भी बात में नहीं पाप को पुण्य बनाने की शक्ति है।
यह ही सर्वोचयुक्ति हैं।
मांगती हूँ पहली क्षमा अपनी श्वेत आकीर्ण आत्मा से
जिसकी शुचिता को भर दिया
कर्मो के किलिष्ट अमिट दाग से
मांगती हूँ दूसरी क्षमा अपने मानस से, जिसे
रखा महरुम आध्यात्मिकता के पोषक तत्व से
क्षमा याचना हे परमेश्वर !
तुम्हें अक्सर जाती हूं भूल।
कांटों के बाजार में बैठ
फिर भी चाहती हूं फूल।
क्षमा याचना आप सभी से
कभी कटु वचन जो बोले।
अल्पमति हूं ,दुरबुद्धी हूं,
मैंने बोल नहीं कभी तोले।
इन्सान हूं भगवान नहीं हूं
यही समझ क्षमा मुझे करना।
देना ये वरदान आ जाए
सबको अपनाना।
अंजू गोलछा
*पर्युषण की पूर्व संध्या पर*
*सभी से कर बद्ध क्षमा चाहती हूँ* 🙏🙏
*क्योंकि*
*क्षमा, पवित्रता का प्रवाह है।*🌊
*क्षमा मांगने से होता*
*अहंकार स्वाह हैं*
*क्षमा शीलवान का शस्त्र🏹 हैं*
*क्षमाअहिंसक का अस्त्र⚔️ है*
*क्षमा, प्रेम का परिधान🥋 है।* *क्षमा, विश्वास का विधान है।* 📚📖
*क्षमा, सृजन का सम्मान है। क्षमा, नफरत का निदान है।*
*क्षमा से बढ़कर और किसी भी बात में*
*पाप को पुण्य बनाने की नहीं हैं शक्ति*💪
*यह ही ईश्वर की हैं,सच्ची भक्ति*
*क्षमा कर देना दुश्मन पर* *विजय पा लेने के बराबर है*
*ये है सरल नीति*
*त्रुटि करना मानवीय है*
*और क्षमा करना ईश्वरीयहैं*
*क्षमा प्रेम की वामांगिनी हैं*👩❤👩
*अपने कर्मों के क्षमा स्वरूप अवश्य भगवान को अर्पण कर सकते हो होगी शांत इससे मन की अग्नि🔥 है।*
*अहं की लकड़ी🪵 में आँसुओं 💧का घी डालो क्षमा करो हे प्रभु!ऐसा कहकर जला 🔥दो*
*औऱ सरल ह्रदय ❤️से सब को माफ कर दो*🙏
*भूल करना मानवीय फ़ितरत है,*
*की होगी कई ख़ता मैंने भी*
*इसी आधार पर मांगती हूँ क्षमा*
*माफ करना सभी*
*बारम्बार क्षमा मांगती हूँ*
*और क्षमा चाहती हूँ*
*आपसे माफ करना।*🙏🙏
*माफ कर दिल❤️ साफ करना*
*औऱ एक मजबूत रिश्ते की नई शुरुआत करना*🤝
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*आपकी क्षमा प्रार्थी*
*अंजुगोलछा*🙏
( *ये महान क्षमा औऱ क्षमापन हैं*
*ये मेरे भावों का संकलन है)*
*खमत खामना*
शब्द छोटा सा है,किंतु अर्थ कितना गहरा,
'क्षमा के बिन धरती सारी हैं, सहरा
जाने-अनजाने जो भूल हुई,
वाणी से, कर्म से, जो चूक हुई,
उसे शून्य करे, क्षमा की धार,
मिट जाए मन का सारा भार।
पेड़ क्षमा करे पतझड़ को,
सूरज क्षमा करे तम को,
तो मैं और आप क्यों न करें क्षमा,
समझे धर्म के मर्म को।
क्रोध पर विजय, सबसे बड़ी जीत,
क्षमा ही है सच्ची प्रीत।
मन का अहंकार आज गले,
रिश्तों में फिर से फूल खिले।
जहाँ क्षमा है, वहीं करुणा है,
जहाँ करुणा है, वहीं धर्म है,
और जहाँ धर्म है,
वहीं मुक्ति का मार्ग है।
*मिच्छामि दुक्कड़म्।*
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