मित्र दिवस
*प्रेषिता अंजुगोलछा*
*मित्रता दिवस*
🙏 *मित्रता दिवस का आध्यात्मिक अर्थ* 🙏
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*उत्तराध्ययन की सूक्तियाँ*
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*अप्पा कत्ता विकत्ता य,*
*दुहाण य सुहाण य।*
*अप्पा मित्तममित्तं च,*
*दुप्पट्ठिय सुपट्ठिओ।।*
☝️आत्मा ही सुख-दु:ख का कर्ता और भोक्ता है।
☝️सदाचार में प्रवृत्त आत्मा मित्र के तुल्य है और दुराचार में प्रवृत्त होने पर वही शत्रु है।
आज अगस्त महीने का पहला रविवार है।आज के दिन को अधिकाँश युवा वर्ग या कोई भी फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाते हैं।एक दुसरे को दोस्ती के बैंड बांधते हैं। अनादिकाल से हम इस चौरासी के चक्कर में भ्रमण कर रहे हैं, इस यात्रा में ऐसा कोई जीव बाकी नहीं जिसके साथ मित्रता ना की हो, मगर जिससे मित्रता करनी चाहिए थी उसके तो हम करीब भी नहीं पहुँचे....उसके बारे में कभी चिंतन ही नहीं किया।
हमारी आत्मा ही सच्ची मित्र है जो हमारे सबसे निकट है।इसलिए अगर किसी को मित्र बनाना हो तो अपने आप को बनाइये। किसी भी कठिन परिस्थिति में हमारी हम साथी हमारी आत्मा ही होगी जो हमें कभी धोखा नहीं देगी।आत्मा तो अनंत ज्ञान से परिपूर्ण है, उसके पास अनंत शक्ति है जो हमें किसी भी विकट अवस्था से बाहर ले आएगी किन्तु उससे इतनी गहरी मित्रता भी होनी चाहिए।अर्थात मित्रता अपनी आत्मा से कीजिये तभी तीसरे भव में ही मोक्ष जाने का मार्ग प्रशस्त होगा 🙏
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