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नवतत्त्व प्रकरण प्रश्नोत्तरी

नवतत्त्व प्रकरण प्रश्नोत्तरी प्रश्न- 1 तत्त्व किसे कहते है ? जवाब- 1 चौदह राजलोक रुप जगत में रहे हुए पदार्थों के लक्षण, भेद, स्वरुप आदि को जानना, तत्त्व कहलाता है । प्रश्न- 2 तत्त्व कितने और कौन कौन से होते है ? जवाब- 2 तत्त्व नौ हैं – 1.जीव 2.अजीव 3.पुण्य 4.पाप 5.आश्रव 6.संवर 7.निर्जरा 8.बंध 9.मोक्ष । प्रश्न- 3 जीव तत्त्व किसे कहते है ? जवाब- 3 जीवों के लक्षण, भेद, स्वरुप आदि को जानना जीव तत्त्व है । प्रश्न- 4 जीव किसे कहते है ? जवाब- 4 जो शुभाशुभ कर्मो का कर्ता-हर्ता तथा भोक्ता हो, जो सुख-दुःख रुप ज्ञान के उपयोग वाला हो, जो चैतन्य-लक्षण से युक्त हो, जो प्राणों को धारण करता हो, वह जीव कहलाता है । प्रश्न- 5 प्राण किसे कहते है ? जवाब- 5 " प्राणिति जीवति अनेनेति प्राणः " अर्थात् जिसके द्वारा जीव में जीवत्व है, इसकी प्रतीति होती है, वह प्राण कहलाता है । प्रश्न- 6 अजीव किसे कहते है ? जवाब- 6 जीव से विपरीत लक्षण वाला अजीव कहलाता है । जो चैतन्य लक्षण रहित जड स्वभावी हो, सुख-दुःख का अनुभव न करे, प्राणों को धारण न करे, वह अजीव कहलाता है । प्रश्न- 7 पुण्य किसे कहते है ? जवाब- 7 जो आत्...

सती मदनरेखा

भारतवर्ष में. सुदर्शनपुर नाम क प नगर था। सुदर्शनपुर के राजा का नाम था, मणिरथ | मणिरथ, न्याय नीती कुशल और क्षत्रियोचित गुण सम्पन्न था । मणिरथ के छोटे भाई का नाम युगबाटु था। युगबाट की तरह वीर और फला कुशल होने के साथ ही, विनम्र भी था | जिसकी यह कथा है, वह सती मयणरहा या मदनरेगा युगबाट की धर्मपत्नी थी । मणिरय और युगयाट्ट दोनों भाइयों में, परम्पर पूर्ण स्नेट या। मणिरथ, अपने छोटे भाई युगबाहु को पुत्र की तरह मानता उस पर पूर्ण विश्वास रखता और उसकी सुविधा का भो समुचित रूपेण ध्यान रखता । इसी प्रकार युगबाहु भी, अपने बड़े भाई! को अपने पिता के समान आदरणीय मानता, उसकी इच्छा विरुद्ध कोई कार्य न करता, तन मन से उसकी सेवा करता, उसके प्रति विनम्र एवं आज्ञाकारी रहता और अपने हृदय में, स्वप्न में भी उसके प्रति दुर्भाव न देता तात्पर्य यह कि दोनों भाइयों में आदर्श स्नेह था। दोनों, दो देह एक आत्मा के समान रहते थे । एक दिन मणिरथ ने विचार किया कि मेरा भाई युगबाहु वीर, विनम्र, न्याय नीति कुशल और मेरा पूर्ण भक्त है । वह मेरा उत्तराधिकारी होने के सर्वथा योग्य है। इसलिए यही अच्छा होगा कि मैं युगबाहु को युवराज पद देकर...

क्षमा

1️⃣मैं सब जीवों सेक्षमा चाहता हूँ। ये किसने कहा था 🔼भगवान महावीर ने 2️⃣क्षमा को किसकी उपमा दी है ? 🔼- क्षमा को शीतल जल की उपमा दी गई है । 3️⃣क्षमा धारण करने में सबसे अधिक कौन से तीर्थंकर प्रसिद्ध हुए हैं ? ,🅰️- तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ 4️⃣रामायण मेंकपिल ब्राह्मण को किसने क्षमा किया  🅰️रामचंद्र जी ने 5️⃣क्षमा ~~ करता है, मुक्त ~~ लोग होते हैं।   🅰️एक/दो। 6️⃣गुरु से क्षमा मांगने के लिए कौनसा सूत्र है?? 🅰️ अब्भुट्ठिओ!! 7️⃣ क्षमा की माता कौन 🅰️अंहिसा 8️⃣पार्श्व नाथ जी ने किस राजा को माफ किया 🅰️यवन  राज को 9️⃣देवर्धि गणि क्षमा श्रमण जी का दुसरा नाम क्या है ?* *🅰️देव वाचक जी  🔟 वैर प्रश्र चिन्ह है तो क्षमा क्या है!!  🅰️पूर्ण विराम। 1️⃣1️⃣श्राप के भय से किस राजा ने क्षमा मांगी❓ 🅰 संयति राजा❗ 1️⃣2️⃣ श्री ठाणांग सूत्र मैं क्षमा का पर्याय वाची शब्द कौन सा है❓ 🅰 खंती❗ 1️⃣3️⃣आयरिय उवज्झाए सूत्❗किस लिए है 🅰️सकलसंघ से क्षमापना करने का सूत्र  1️⃣4️⃣क्षमा मांगने आये भाई की हत्या किसने की 🅰️कमठ ने 1️⃣5️⃣ वैर का परिणाम कितना खतरनाक है यह समझने के लिए ...

क्षमा

🪔🪔🪔 *📝टाँपिक 👉  क्षमा का गुण सर्वश्रेष्ठ गुण   ✍️ !* 👑👑👑  करते हैं आपको प्रणाम सा 🙏🙏*  *🙏🌹जय जिनेन्द्र सा 🌹🙏* यति धर्म  में प्रथम  क्षमा 🅿️1️⃣ पर्युषण महापर्व का प्राण क्या है❓ 🅰1️⃣ क्षमापना❗ 🅿2⃣ श्री ठाणांग सूत्र मैं क्षमा का पर्याय वाची शब्द कौन सा है❓ 🅰2️⃣ खंती❗ 🅿3⃣ क्षमा मार्दव आर्जव क्या है❓ 🅰3️⃣ यति धर्म❗ 🅿4⃣ किस श्रावक ने अपनी पत्नी से क्षमा मांगी❓ 🅰4️⃣ महाशतक जी ने अपनी पत्नी रेवती से❗ 🅿5⃣ श्राप के भय से किस राजा ने क्षमा मांगी❓ 🅰5️⃣ संयति राजा❗ 🅿6⃣ किस परिव्राजक ने किस श्राविकि से क्षमा मांगी❓ 🅰6️⃣ अंबड जी ने सुलसाजीसे❗ 🅿7⃣ किस राजा के जैसी क्षमापना करनी चाहिए जिसने जीता हुआ राज्य भी लौटा दिया❓ 🅰7️⃣ उदायन राजा❗ 🅿8⃣ कौन से श्रावक से गौतम स्वामी ने क्षमा मांगी❓ 🅰8️⃣ आनंद श्रावक से❗ 🅿9⃣ किस माता ने अपने पांचों पुत्रों के हत्यारे को क्षमा कर दिया था❓ 🅰9️⃣ द्रौपदी❗ 🅿1⃣0⃣ हे देवी! तू पतिव्रता है! मेरी भूल क्षमा करो!!! किसने किससे कहा❓ 🅰1️⃣0️⃣ पवनंजय जी ने अंजना सतिजी से कहा❗ 🅿1⃣1⃣ शिष्या से माफी मांगने वाली गुरुणी ...

नव पुण्य

  यह नौ पुण्य क्रमशः पुण्यानुबंधी पुण्य के कारण है और आत्मा के विकास की प्रारंभिक अवस्था है। नवपद यह आत्मा के विकास का शिखर है, उस शिखर पर पहुंचने के लिए नवपद के ही अंशरूप इन नौ पुण्यो में प्रव्रत्ति करनी चाहिए, ऐसी परमात्मा की आज्ञा है। इन सभी पुण्य का पात्र में सदुपयोग करने से किस प्रकार 18 पापों की शुद्धि होती है, उसका संक्षेप से सापेक्ष रूप से इस प्रकार विचार कर सकते हैं। (1) अन्न पुण्य:- प्राणों को धारण करने में अन्न की अत्यंत जरूरत है। अन्न के बिना लंबा जीवन नहीं जिया जा सकता है। इतना ही नहीं परंतु अन्न का दान करने से जीवनदान दिया ऐसा माना जाता है। अन्न यह दुनिया में प्राण रूप है। 1) अन्न देने के द्वारा अन्य जीवो के प्राण धारण में सहायक बनने से हिंसा-पाप की शुद्धि होती है, हिंसाजन्य पाप का नाश होता है। 2) अन्न द्वारा दूसरों को प्राण देने वाला व्यक्ति मृषावाद करते हुए दूसरे जीव को दु:खी नहीं कर सकता, दूसरे जीवो के प्रति दया की सच्ची लगन प्रकट होने पर किसी जीव को दिल से ठेस पहुंचे ऐसे कठोर या असत्य वचन का प्रयोग करने का भी अपने आप बंद हो जाता है, इस प्रकार अन्न पुण्य से प्रथम क...

कयवन्ना

  कयवन्ना( कृतपुण्यक शेठ)और माया का अपूर्व चमत्कार  प्रथम प्रकरण पूर्व देश में राजग्रही नगरी थी। जिसमें धनदत्त नामक शेठ रहता था जिसके कोई पुत्र नहीं था। भाग्यवश प्रौढ़ावस्था में उसके एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम कयवन्ना रखा गया था। जिसके लक्षण ओर चेष्टा से यह पाया जाता था कि वह विवेक विद्या और नीति में निपूण होगा। प्रकृति का, यह सदा नियम है कि आत्मा जिस २ गृह (काया) में रहता है और जैसे २ कर्तव्य करता है उसी अनुसार पुनर्जन्म में वे ही अनुभव दूसरे गृह में प्रवेश करते समय साथ चले जाते हैं । इसलिये बहुत से मनुष्य जन्म से दुष्ठता की तरफ झुकते जाते हैं। और बहुत से भक्ति नीति-और देश सेवा की तरफ अपना लक्ष खिंचते रहते हैं ।  इसी नियमानुसार कयवन्ना बालवय से ही नीति ओर वैराग्य की तरफ झुका हुआ था और वह मात्र अभ्यास, शुभ भावना, और वैराग्य में ही आनन्द मानता था । धनवानों का पुत्र होने पर भी कनक कामिनी की, ओर का प्रेम तनिक मात्र भी न था। उसका मन यहां तक भद्रिक था कि वह अपनी देवांगना समान स्त्री की तरफ तिरछी नजर से भी नहीं देखता था और न उसकी स्त्री के हाव भाव और श्रृंगार भी उसके मन को ...

नायक या खलनायक

  *♈10) एक श्रेष्ठ पुरुष था, नायक नही खलनायक था ।* *सती का हरण किया था, मरकर नरक में गया था ?* *Answer :- रा 🏹!* रावण *Topic -::- नायक या खलनायक* उदयन राजा के जीवन के खलनायक विनयरत्न मुनि , चंडप्रद्योत जी पहले भव मे तुमने  मुझे सताया 9 भव मैंने मारा 1️⃣ *कुमारपाल राजा जी के जीवन में कौन खलनायक बनें*❓ 🅰️ *अजयपाल जी* 2️⃣ *वसुमति जी के जीवन की खलनायिका कौन थी*❓ 🅰️ *मूला सेठानी जी* 3️⃣ *श्रेणिक राजा जी के जीवन के नायक कौन बनें*❓ 🅰️ *अनाथि मुनि जी* मैंने अपनी पत्नि को मारा अर्जुन माली , बंधुमति जी बेटा होकर होकर दुश्मन बना कोणिक जी जँवाई को मार डालने वाला सौमिल जी 4️⃣ *पांच पांडव जी के जीवन के खलनायक कौन बनें*❓ 🅰️ *कौरव जी* भाई - भाई का दुश्मन हाथी हार के कारण कोणिक ,हल्ल विहल्ल 5️⃣ *अजयपाल जी किस की जिंदगी में खलनायक बनें*❓®️ 🅰️ *कपर्दी मंत्री जी* 6️⃣ *श्रीपाल राजा जी के जीवन में खलनायक का किरदार किसने निभाया*❓ 🅰️ *धवल सेठ जी* 7️⃣ *देवानंदा जी के जीवन में खलनायक कौन थे*❓ 🅰️ *स्वयं - पूर्व भव‌ के कर्म* 8️⃣ *सुंदरी जी के जीवन में खलनायक बनते बनते नायक कौन बना*❓ 🅰️ *भरत चक्र...

जीवाजीवविभक्ति पर प्रश्न

.            ।। श्रीमहावीरायनम: ।। जीवाजीवविभक्ति पर आधारित प्रश्नोत्तरी ( प्रत्येक प्रश्न के सही उत्तर के  दो अंक है ) 🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹 प्रश्नपत्र–6-07-21       उत्तरपत्र–15-07-21 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ .                       1️⃣ असंगत उत्तर पर ✅ का निशान लगाएं। (1) वाणव्यंतर देवों का निवास स्थान है– (अ) वनों में            (ब) वृक्षों में (स) आवासों में   ✔   (द) गुफा आदि अन्तरालों में ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (2) सूमेरुपर्वत की निरन्तर प्रदक्षिणा करते हैं– (अ) सूर्य              (ब) चन्द्रमा (स) तारे              (द) ग्रैवेयक देव✔ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (3) कठोर बादर पृथ्वीकाय है– (अ) रांगा             (ब) शीशा (स) वज्र               (द) पनक✔ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ (4) यह द्रव्य ...

गुरु पूर्णिमा कथा

 🚩आषाढ़ शुक्ला गुरुपूर्णिमा, शनिवार, वी.सं.2547, दिनांक: 24जुलाई,2021 के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। इस दिन 24 वे तीर्थंकर जगद्गुरु श्री महावीर स्वामी, उनके प्रथम गणधर शिष्य श्री गौतम स्वामी, श्रुतस्कन्ध यंत्र, श्रुतदेवी इनकी प्रतिमाओं का  अभिषेक-पूजा कर अपना जीवन सफल करें। धर्म- गुरुओं का  दर्शन-पूजन करें,  उनका प्रवचन सुने ,उनको आहारदान दे और उनकी  वैय्यावृति करें। 🌕⭐️🌕⭐️🌕⭐️🌕⭐️🌕⭐️🌕⭐️🌕⭐️🌕 🎆🎆🎆🕉️जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा कथा🕉️🎆🎆🎆 🚩 भारत धर्म तथा संस्कृति प्रधान देश है और भारत ही क्या सारे विश्व में गुरू का स्थान ईश्वर के समान और कहीं कहीं तो ईश्वर से भी प्रथम पूज्यनीय बताया गया है। हमारी संस्कृति उन्हें केवल गुरु नहीं ‘‘ गुरू देव’’ कहती है। जैन धर्म में तो ‘‘गुरू की महिमा वरनी न जाय ‘‘ गुरूनाम जपों मन वचन काय‘‘ कहकर गुरू को पंच परमेष्ठि का स्थान दिया है। देव, शास्त्र, और गुरू की त्रिवेणी में करके ही मोक्ष महल में प्रवेश की पात्रता आती है और उसके फलस्वरूप संसार के आवागमन से मुक्ति मिलती है। गुरू हमारे जीवन से अज्ञान का अन्धकार मिटाकर एक नई द...

तीसरा कौन

 *आज का टॉपिक*~ *साथी बताइए*   *हम दो है तो तीसरा कौन* ❓ नैगम, संग्रह---- 🅰️व्यवहार जीव शब्द, अजीव शब्द, ----- मिश्र शब्द असंयमी,---------संयमी संयमासंयमी उत्पाद,------व्यय सत के 3 लक्षण- ध्रौव्य 📚🖌📘🖋📙🖍📚🖌 मन दण्ड ,वचन दण्ड  ----- काय दंड 🅿️ 1 :--  अहिंसा , सयंम --- 🅰️  माया शल्य, -----मिथ्या शल्य। निदान शल्य ऋद्धि गौरव, रस गौरव,---- साता गौरव 🅿️ 2:-- ज्ञान ---- चारित्र 🅰️  ओज, रोम,--- 🅰️कवल मति अज्ञान, -------,श्रुत अज्ञान, विभंग अज्ञान संज्ञी ,असंज्ञी----  नोसंज्ञी , नो असंज्ञी 🅿️ 3:-- --- वचन , काया 🅰️  🅿️4:-- आधि , व्याधि --- 🅰️  🅿️ 5:--  बचपन ---- बुढापा 🅰️  🅿️ 6:-- जघन्य , मध्यम ---- 🅰️  🅿️ 7 :-- ---- द्वेष , कलह 🅰️  🅿️ 8:-- शुभ ---- मिश्र 🅰️  🅿️ 9:-- ---- अचित , मिश्र 🅰️  🅿️ 10 :-- कम खाओ ----- नम जाओ 🅰️  🅿️ 11:-- कामी , क्रोधी ---- 🅰️  🅿️ 12:-- गंगा , यमुना ---- 🅰️  🅿️13:-- चोरी , झुठ ---- 🅰️  🅿️ 14 :--  जर , जोरू ---- 🅰️  🅿️ 15 :-- ...

अंत में न ण

  अनिलवेग किसके हाथी का नाम था चंडप्रद्योतन  राजा तीर्थंकर के4 शाश्वत नाम में एक चन्द्रानन मान कषाय का स्थान कँहा गर्दन 1-2 गुणस्थान में कौन सा गुण पाया जाता है तमोगुण अंतरद्वीप कितने है छप्पन अप्रत्याख्यानी लोभ किसके समान खंजन निलवान वर्षधर पर्वत की नौ कूट में से एक उपदर्शन  जीव का स्वभाव ऊध्र्वगमन अग्नि का आहार ईंधन कायोत्सर्ग के 16 आगारों में एक खलिण श्री पाल जी के चाचा जी A अजित सेन (2)राजीमति महासती का जीव कहाँ से च्यव कर आया था? उ-अपराजित विमान गौतमादि 18 मुनियों ने कौनसा तप किया था? उ-गुणरत्न संवत्सर तप चौबीस तीर्थंकर की बेटियां कितनी? उ-तीन। देवकी के प्रथम पुत्र का नाम अनिक सेन/ अनेक सेन दसवे आप शब्द सुनकर पुनः संयम लेने वाले? नंदिषेण

नवतत्त्व प्रकरण प्रश्नोत्तरी

 नवतत्त्व प्रकरण प्रश्नोत्तरी    11   -   20  प्रश्न- 11 पुण्य के 9 प्रकार कौन कौन से है ?  जवाब- 11 पुण्य के 9 प्रकार निम्नोक्त है ।  अन्न पुण्य - भुखे को भोजन देना ।  पान पुण्य - प्यासे की प्यास बुझाना ।  शयन पुण्य - थके हुए निराश्रित प्राणियों को आश्रय देना ।  लयन पुण्य - पाट-पाटला आदि आसन देना ।  वस्त्र पुण्य - वस्त्रादि देकर सर्दी-गर्मी से रक्षण करना ।  मन पुण्य - हृदय से सभी प्राणीयों के प्रति सुख की भावना ।  वचन पुण्य - निर्दोष-मधुर शब्दों से अन्य को सुख पहुंचाना ।  काय पुण्य - शरीर से सेवा-वैयावच्चादि करना ।  नमस्कार पुण्य - नम्रतायुक्त व्यवहार करना ।  प्रश्न- 12 पाप किसे कहते है ?  जवाब- 12 पुण्य से विपरीत स्वभाव वाला, जिसके द्वारा अशुभ कर्मो का ग्रहण हो, जिसके द्वारा जीव को दुःख, कष्ट तथा अशांति मिले, उसे पाप कहते है ।  प्रश्न- 13 पाप कितने प्रकार का है ?  जवाब- 13 पाप 2 प्रकार का हैः- 1.पापानुबंधी पाप 2.पुण्यानुबंधी पाप ।  प्रश्न- 14 पापानुबंधी पाप किसे कहते है ?...

सास बहु

सास बहू की जोड़ी सातियो में आती है सास ने बहु पर शंका की * ❓ 🅰 * अंजना जी पर केतुमती जी * सास मोक्ष में ने बहु देवलोक में कुंती जी ,द्रोपदी जी भुआ भतीजी बनाम सास बहू प्रियदर्शिनी औऱ सुदर्शना जी

भिक्षु स्वामी पर कविताए

 भिक्षु के  जन्मोत्सव पर चंद लकीरों को खिंच भावों की  श्रद्धांजलि दी है। हत प्रभ सी हूं, उनके व्यक्तित्व से अंजुगोलछा का   🙏 *नमन नमन नमन* 🙏 - *जब धरा पर*  *विकल रागिनी बजी* *औऱ हाहाकार स्वरों में* *घोर वेदना थी छाई*  *तब सिंह का स्वप्न माँ को दिया दिखाई ,औऱ भिक्षु जैसे पुत्र की पाई बधाई*   भिक्षु स्वामी  ने सब को धर्म की सच्ची राह दिखाई जब छोटे छोटे जीवों की हिंसा को इस अहिसंक धर्म  में वैध बताया जाता था। एक घड़ी भी शुद्ध साधुपन नहीं पाला जा सकता ये धर्म आचार्य ने फरमाया था तब शुद्ध धर्म का  उदघोष ले   अपने पूरे जीवन को भिक्षु जी ने धर्म मय बनाया था जैन धर्म के पुनरुद्धारक बन आगम सम्मत जैन धर्म समझाया था। कंटकाकीर्ण थी राह बहुत विरोधियों ने  विरोध का जाल बिछाया था। अपने भी विमुख पराए बन आंखों के आगे आएं पग पग पर घोर निराशा के काले बादल छा जाएं धर्म की जटिल समस्या हैं बढ़ी जटा-सी  कैसी थी? पर भी आगम की झाड़ी धूल हृदय में ऐसी विभूति थी उनकी फिर सुप्त व्यथा का जगना सुख का सपना हो जाना पर कब तक उन्मुक्त पंछीको असत्य...