संदेश

तीन बातें

तीन बातें कभी न भूलें - प्रतिज्ञा करके, क़र्ज़ लेकर और विश्वास देकर। - महावीर तीन बातें करो - उत्तम के साथ संगीत, विद्वान् के साथ वार्तालाप और सहृदय के साथ मैत्री। - विनोबा तीन अनमोल वचन - धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया और चरित्र गया तो सब गया। - अंग्रेजी कहावत तीन से घृणा न करो - रोगी से, दुखी से और निम्न जाती से। - मुहम्मद साहब तीन के आंसू पवित्र होते हैं - प्रेम के, करुना के और सहानुभूति के। - बुद्ध तीन बातें सुखी जीवन के लिए- अतीत की चिंता मत करो, भविष्य का विश्वास न करो और वर्तमान को व्यर्थ मत जाने दो। तीन चीज़ें किसी का इन्तजार नहीं करती - समय, मौत, ग्राहक। तीन चीज़ें जीवन में एक बार मिलती है - मां, बांप, और जवानी। तीन चीज़ें पर्दे योग्य है - धन, स्त्री और भोजन। तीन चीजों से सदा सावधान रहिए - बुरी संगत, परस्त्री और निन्दा। तीन चीजों में मन लगाने से उन्नति होती है - ईश्वर, परिश्रम और विद्या। तीन चीजों को कभी छोटी ना समझे - बीमारी, कर्जा, शत्रु। तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो - मन, काम और लोभ। तीन चीज़ें निकलने पर वापिस नहीं आती - तीर कमान से, ब...

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार

किसी ने स्वामी जी से पूछा सब कुछ खो जाने से भी बुरा क्या है  स्वामी जी ने कहा -वो उम्मीद कोन जिसके भरोसे सब कुछ पाया जा सकता है , उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये. उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो , तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो , तुम तत्व नहीं हो , ना ही शरीर हो , तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है. एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो. हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते 

आदर्श उक्तिया

बड़े कामों में छोटे रहने से अच्छा है . छोटे कामों में बड़ा बनना कमज़ोर व्यक्ति से दुश्मनी ज्यादा खतरनाक होती है क्योँकि वह उस समय वार करता है जब हम कल्पना भी नहीँ  मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही, गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं कौन देता हे यहाँ उम्र भर का साथ    यहाँ     यहाँ   तो अर्थी में भी कन्धा बदलते है  दो दिन की है जिन्दगी दो उसूलो के साथ जियों तो फूलों की तरह बिखरो तो खुशबु की तरह " दिमाग ठंडा हो दिल में रहम हो जुबान नरम हो , आँखों में शर्म हो तो फिर सब कुछ तुम्हारा है " जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। जीवन की सफलता का मून मंत्र बनाते हुआ कृष्ण बलराम से कहते हैं - "जीवन रूपी रथ के चार चक्र हैं - धर्म, नीती, पराक्रम, और आत्मविश्वास । इनमें से किसी एक से रहित व्यक्ति जीवन में सफलता नहीं प्राप्त कर सकता । जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ - ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं। क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है; और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है। दिल से दूस...

दूसरों का मैल(बुराई)

दूसरों   का मैल(बुराई) निचोड़ -2  कर अपना  घर   गन्दा  मत करो , नहीं तो  ,इतनी  दुर्गन्ध फैलेगी,  कि वो आप स्वयं भी सहन नहीं कर  पाओगे। और लगातार इस तरह का  विष  वमन करोगे तो इतनी  दुर्गन्ध और सड़ाँध फैला दोगे, कि  आस -पास  के लोगों  को भी परेशान करदोगे, मोरल  ये हैकि  दूसरों के बुरे कर्मो कि विवेचना को ज्यादा महत्व  न दे कर दूसरों के सत्कर्मो  का जिक्र ज्यादा करो ताकि आपका घर-प्रागंण  महके . जिससे आपके साथ -२ आपके आस पास का वातावरण भी गमक उठे .

सावन मिलन का गेम

 सावन मिलन   का गेम  ये कुछ नाम है जो आप सावन के गेम में यूज़  कर सकती है  चिट बनाकर चाहे हाउजी में इस्तेमाल कर के शिव                                   त्यौहार                        पवन पार्वती                                मस्ती                          पावन     राधा                                   गीत                             विरह कृष्ण                                 फूल         ...

होली स्पेशल हाऊजी

  होली स्पेशल  हाऊजी  यहाँ  houies  की टिकिट  लगाये    ईस प्रकार  ऑप्शन  रखे , जिसका भी कुछ भी पूरा हो वो ये नहीं कहेगा लाइन  हो गई वो उसके आगे लिखे गाने की लाइन  बोले ग तथा दो लाइन जरुर गाए . नहीं तो बोगी हो जायेगा . पहली  लाइन ---------होली  के दिन दिल खिल ------ दूसरी  लाइन --------होलिया में उड़े रे       ---------- तीसरी  लाइन ------रंग  बरसे           --------------- चौथी  लाइन ------ जा रे  हट               ------------ पाँचवी  लाइन ------ अंग से अंग लगा    ------------ छठी  लाइन -------- होली खेले  रघु  ----------- प्रथम अर्द्ध  सम्पूर्ण  वास -----कृष्ण  गोंपी पर गाये  द्वितय अर्द्ध सम्पूर्ण  वास------- मधुवन  पर गाये    सम्पूर्ण  वास      -----------------रंग ...

Holi aayi

होली बड़ा प्यारा त्यौहार रंग पानी पिचकारी  की धार | झूमें नाचे मस्ती में यार , करें रंगों की बौछार । कैसे मजे की  होली आई , सब ओर खुशियाँ छाई |

होली का त्यौहार।

हम बच्चों  की मस्ती का त्यौहार, जल्द आ रहा होली का त्यौहार। कोई हाथी  का मुखोटा लगाएगा, कोई शेर बनकर गुरायेगा । कोई राक्षस का मुखोटा लगा,  बड़े बड़े दांतों से डराएगा। कोई कोई तोह गधा बनके आएगा  और ढेंचू- ढेंचू का राग अलापे गा। बहुत मजा आएगा ,काले लाल गुलाल खूब उड़ायेंगे जो नहीं खेले गा । उसे सब मिलके रंग के टब मैं डूबायेंगे और हाहा का शोर मचायेंगे । पिचकारी भी कई तरह की लायेंगे कोई बन्दुक कोई बैट  वाली । कोई कोई तो गुलेल वाली लायेगा कोई कोई सर पर रंग बिरंगे बालों का गुच्छा   लगा जोकर ही बन जायेगा। हाहा कितने हुडदंग का त्यौहार होली बच्चों  का प्यारा त्यौहार। .  🔴🟠🌞🟡🔵 *सूरज की  किरणें* *खुशियों की बहार*, *लाल गुलाबी रंग है* *झूम रहा संसार*..  *शुभ हो आपको* *आध्यात्मिक चेतना*  *का ये त्योंहार* 🟡🔵🟠🔴 *वातवलय किस रंग के हैं* ?  *घनोदधिवलय गोमूत्र के रंग* *का,तो घनवातवलय काले रंग की मूंग के समान एवं तनुवातवलय अनेक रंगों वाला है*। 🔴🟠🔵🟡🟡🟢 *ऐसे भांत भांत के रंग मिले है...

pita khula aakash ho tum

पिता  छोटे से परिंदे का विस्तृत आसमान है और नन्हों की असीमित उड़ान है। .उठा तर्जनी दूर कंही गंतव्य  दिखाते है .  हो सफल जीवन हमारा , येही अपना मन्तव्य बनाते है .   प्रेमसिन्धु जो छिपा  आप में,   उसमे भीग कर हम इतराते है .   आपकी स्नेह छाँव में   डर  नहीं  जहाँ का,   हम निर्भय विचरते है  बूंद  बूंद से भरा हमारा  घट,  खुद खाली  होकर जिताए हमें सदा खुद हार कर मेरे तुतलाते  बोलों ने  अर्थ आप से पाया,  हर मुश्किल में संबल आप को पाया मैं निशब्द भला क्या बोलू,आप  संवेदना हैं,एहसास हैं। मेरा विश्वास है , पापा आप मेरे लिए  सब से ख़ास है

शिव भोले है इसी लिए दंण्ड कमंडल वाले है

शिव भोले है इसी लिए दंण्ड कमंडल वाले है शिव सत्य है ,   कल्याणकारी है ,और  सुन्दर है , जल्दी मान जाते है ,जल्दी सबकी इच्छा  पूरी कर देते  है ,पर  खुद भगवान्  होकर भी ,एक छोटा सा घर भी नहीं बनाये,  ना  आभूषणों से सज्जित  है ,बस  मृगछाला लपेट  कैलाश  में धुनी रमाते रहे , शायद इसी के कारण उन्हें भोले ,कहते है , और सभी  अपना काम उनसे सहज  ही  करवा  लेते है , आज उन्ही जैसे सरलचित्त जो शिव सदृश्य होते है उनको इस्तेमाल करते है ,काम होता है तो याद करते हैं ,औऱ फिर यूँ व्यवहार करते जैसे वे कुछ है ही नहीं उन्हें  बेचारगी नजर से भी देखते है ,बस डरते है, तो केवल उनके तांडव से . जो ऐसे लोग  करते भी तो कम है .

स्वस्ध परिवार का आधार

स्वस्ध परिवार  का आधार  भावना  से जुड़े रिश्ते ही स्वस्थ होते है  जिसे  उत्सर्ग की ,प्रधानता और स्वार्थ की नगण्यता . बंधे रखते है  रिश्ते ऐसी  कसौटी,  परीक्षा  और  प्रतियोगिता है    जिसमे एक दुसरे को जीताने की मस्कत चलती है  ऐसा  भावना प्रधान है , जिसमे दुसरे की  खुशीकी जदोजहद चलती है  जिसमे मै, की कोई कहानी नहीं  बस हम की बात चलती है  बड़ों को सन्मान, छोटों को प्यार' एक दुसरे की ख़ुशी में तन मन दो वार गुणों का पान , अवगुणों से रहे बेध्यान , बस यही यही है स्वस्थ परिवार का आधार  और ऐसे ही निर्माण होगा स्वस्थ सुन्दर विश्व परिवार  परिवार के प्रति हो , निष्ठा,प्यार और विश्वाश तनिक भी न हो प्रमाद के लिए अवकाश . इन्ही मानको  से बस निर्माण होता है निहायत अपना प्यारा स्वप्निल परिवार .

स्वास्थय हज़ार नियामत

स्वास्थय हज़ार नियामत १ जैन, पुराण. वास्तु या विज्ञानं  सबका प्रथम यही है .ज्ञान  स्वस्थ रहे  मानव तो ही कर पायेगा ,उपार्जित धन . और लगा पायेगा  ,प्रभु में ध्यान . २ .करो योग और प्राणायाम ये तो है ही अच्छा पर पर ख़ुशी मन से खाओगे तो पत्थर      भी लोगे पचा  ३ भूख बढाओ फिर खाओ 

बीबी का गारंटी कार्ड

बीबी  का गारंटी कार्ड हमारे  यहाँ बीबी का गारंटी कार्ड होता है , मामूली नहीं लाइफ लॉन्ग होता है युरोप या अमेरिका की तरह नहीं  कि जब मन   चाहा हसबैंड का बैंड बना दिया स्कूटर  कि स्टेपनी  कि तरह, एक पति पंचर हो जाने पर दूसरा बदल लिया यंहा तो बाँधती है ऐसे कि हिले तो भी एक कांड होता है जी हाँ -हमारे  यहाँ बीबी का गारंटी कार्ड होता है ,  ------------------------------------------------ बीबियाँ ऊपर वाले को हाज़िर नाजिर जानकर ,सात फेरे लगा कर सात वचन भरकर ,जीवन मरण की कसमें खा कर वैवाहिक जंग में उतर पड़ती है , बिन ढाल तलवार लडती  है ' जीतने का बस उसे ही अधिकार होता है हमारे  यहाँ बीबी का गारंटी कार्ड होता है , है कोई माई का लाल जो पीछा छुड़ाकर  भाग सकता है ससुर महोदय की भी इसमें  भागीदारी अहम् रहती है अपनी लाडली के नट बोल्ट इतने टाईट कर देते है फिर ढीलियाने का कोई काम नहीं होता है ढीले करने की कोशिश में बेचारा पति क्लीन बोर्ड होता है हमारे  यहाँ बीबी का गारंटी कार्ड होता है , मेंटिनेंस इसकी जिम्मेदा...
जिनका संकल्प ,सबल है उनका जीवन सार्थक है उसी का जीना जीना है जिसे लक्ष्य साधना से प्रीत है बढ़ते ही रहे जो आगे ,मार्ग चाहे  अवरोधों से पूर्ण हो असमंजस  से उबरे वही विचार जिसके दृढ  हो सफलता चूमती है कदम ,उन्ही के जिनमे चरम पे पंहुचने का उन्माद हो कहते है ना ------ पागलपन बहुत मुश्किल से आताहै , पर जब आता है, तो आदमी मंजिल तक पंहुँच जाता है !

देश तुझ पर कविता करने को जी चाहता है

देश तुझ  पर कविता करने को जी चाहता है बिखरने को आमादा खड़ा , सीमा हीन सा है पड़ा तुझे ए मेरे वतन कविता में संजो लेने को जी चाहता है कुछ देश पर ,कुछ काल पर  इस बदलते आयाम पर कुछ लिखने को जी चाहता है . बिखरे ऐतिहासिक  तत्व छिटक छहरी सागर बूंदों सरीके इन्हें अंजुली में भरके , भारत माँ को समर्पित करने को जी चाहता है लड़ाइयों को भी नाम दिया इतिहास ने देश प्रेम की जगती ज्वाला को भी क्रांति का नाम दिया इतिहास ने पर आज जो धधक रही है ,अनाम  सी  ज्वाला जन २ के मन में  इतिहास मौन सा दिखता है . आज इन आक्रोशों को एक नाम देने  का जी चाहता है 
मेरी ख्वाहिशों    पे मेरे मीत न जा  ख्वाहिशे  शुरू तुझ से हैं  इनके टूटने पे न जा  तेरे लबों की एक हंसी पे वार दूँ  हजारों ख्वाहिशें  तू मेरे वार देने पे न जा 

चार लाइन

हे लक्ष्मी मैया! सुने थे ये हम  तुम लड़ाई झगड़े से दूर रहती हरदम  फिर  संसद में  कैसे तुम रम गई  क्या तुम भी कलयुगी हो गई

कडवा सच

कडवा सच  माँ  तू अपने लाल को पैदा करके खुश मत हो  तू तो ईश्वर से खैर मना  क्योंकि  आने वाले समय में ऐसा ही होगा  कोई आंतक वादी होगा  कोई आंतक वाद का शिकार  और माँ तुम तो दोनों रूपों में ही ठगी जाओगी . अंग्रेजो से  देश  आजाद हो गया पर  आंतक वाद से नहीं हो पायेगा  ये अपनी धरती के खरपतवार है जितना काटो उग -उग आएगा

इमोशनल अत्याचार

  इमोशनल  अत्याचार  इस आयातित अपसंस्कृति में  भावों का बलात्कार होगया  इसीलिए लोग कहते है इमोशनल अत्याचार हो गया  भावों के तार जुड़े न जुड़े, शारीरिक तार जुड़ते है एक के रहते दूसरे से बंधते है , अपने प्यार की तहकीकात करवाते  है और छले जाते है अपने गिरेबान में मुंह छिपा रोते , चीखते , चिल्लाते है  दो खानदान की   रुसवाई करवाते  है मैं ये कहती हूँ , ये प्यार नहीं ढकोसला है प्यार तो प्यारा  होता है, खुद से ज्यादा प्यार पर भरोसा होता है  प्यार तो विश्वास का दूसरा नाम है  बिना शर्तो का जज्बा होता है ,पर जो ये कहता है ,वही हंसी का पात्र बनता है U TV बिंदास वाले आज के इस जज्बे से खूब खेलरहे है और सच  ये भी इमोशनल अत्याचार कर रहे है हकीकत खुली पड़ी है अब इमोशन में कुछ नहीं शेष बस अत्याचार ही अत्याचार  हो गया है भावों का सच बलात्कार हो गया

मेरे अपने विचार

मेरे अपने विचार  तुम देवता होगये दुनिया  की नज़र में .पर ये भी एक सच है  ,जब  जब तुम दुखी या सुखी हुए,तब तब तुममे तृष्णा  थी .  भावों  के अनुप्रेषण से ,संवादों के सम्प्रेषण से , कुछ कृति  अनमोल करो  अपने ही अनुभवों से  हम क्या थे क्या होंगे  क्या से क्या हो गए  बदले स्वभाव  आश्चर्य जब स्वयं को आजाये  समझ  जीवन बहुत कुछ घटित  हो गया जो विपरीत था तुम से  रास्ते मिलते ही चले जायेगे ,पाँव उधाके तो देखो  काफिले बहार के भी आयेगे, चमन  बसा के तो देखो  जहा स्वंयं के आत्म विश्वास में कमी आती है वहीँ से अन्धविश्वास पनपने लगते है . मनुष्य  एक समझदार प्राणी है तभी तो उसने सीख लिया है करना  खुद से खुद का सौदा  दुसरे  के हाथों . भिभक्षु है सभी यहाँ अधिष्ठाता कौन बनेगा  ? यास्टिक हे यहाँ सभी  बुद्ध यहाँ कौन बनेगा ? क्षीर को क्षार ,बनाते है  अनिल में  अनल देखते है  दिग्भ्रमित ! से लोग  अल्लाह ,ईश में फर्क करने वाले   ये तो इंसान को भ...

व्यंगातम कविता

व्यंगातम कविता  फील गुड   (एक बार चुनाव में बीजेपी ने नारा दिया था - फील गुड  बस वही नारा उनका किनारा कर गया .उस वक़्त मैंने ये कविता उस वक़्त के हालात को देख कर लिखीथी )                              फील गुड है या ख्वाब सुनहरा बता तेरा स्वाद है क्या ?                 तिलस्मी दुनिया वाले आओ बताएं इसका हाल है क्या ? जेल से  भागे कैदी सिपाही सो रहे है,  साहूकार  तो अपनी खैर मना रहे   ,कैदी   फीलगुड मनारहे है                                     रेल रोज़ पटरी से उतरती है                                    रोज़ इस्तीफ...

मुक्तक

मुक्तक    हर नज़र साधू नहीं ,हर बसर गाँधी नहीं   सूत हर रेशम नहीं, वस्त्र हर खादी नहीं   नित की कसौटी पर मत कसो इंसान को  आदमी -है आदमी सोना नहीं चांदी नहीं  एक शाम मैं घुमने निकला ,दिल में बड़े अरमान थे  एक तरफ थी झाड़ियाँ ,एक तरफ शमशान थे  एक हड्डी जो मेरे पांव को छू गई उसके यहीं बयान थे ए मुसाफिर !जरा संभल के चल हम भी कभी इंसान थे  मुरझ -मुरझ के गिर जाने को हर कुसुम खिलता  है  कितने ही दीप जला दो पर  दीप ना दिन को जलता  है मन चाही हर बात मिले  ऐसी चाह निरर्थक कितने ही हो रंगीन जिन्दगी ,पर बेरंग कफ़न मिलता

चुटकले

चुटकले  आरोगो सा  एक अँधा किसी मारवाड़ी के घर खाने जाता है ,पर उसे मारवाड़ी तो आती ही नहीं थी , वहां पंहुचते ही सब ने बहुत आवभगत की और कहा - खाना परोस  के कहा अरोगो मारवाड़ी में खाना खाइए को आरोगो सा कहते है . उस सूरदास (अँधा ) व्यक्तिको मारवाड़ी तो आती नहीं थी उस  ने सोचा आरोगो सा कोई खाने की चीज का नाम है वह मन ही मन खुश हो रहा था ,आज तो खाने में मुझे कोई नई स्वादिष्ट चीज मिलेगी .जिसका नाम आरोगो सा है . उसने बड़ी आतुरता से सारे  खाने को टटोला  सभी चीज पहचान रहा था . पूरी ,सब्जी , कचोरी, राइता आदि,पर वह नहीं थी जिसे वह ढूंढ़ रहा था , तो उसने  सोचा वह कोई मीठी चीज है लास्ट में आएगी . उसका खाना लगभग खत्म होने को था, पर आरोगो सा तो आई ही नहीं उसकी हिम्मत ने जबाब दे दिया ,उसने किसी से झिझकते हुए  पूछा -, भई,क्या बात है मेरी प्लेट में तो आरोगो सा नहीं आई वह व्यक्ति भी मजाकिया था ,वह सारी बात समझ कर बोला- अरे आई नहीं में अभी लाता हूँ , और वो उसे एक पत्थर देकर बोला लो साहब आरोगो सा .सूरदास बहुत खुश हुआ  ,और खाने की कोशिश करने लगा पर पत्...

ढूँढ़ते रहे जायोगे

नारी में हया ,पुरुष में साहस ,बच्चों में बचपना  ढूँढ़ते रहे जायोगे धरम में शांति ,वीरों में क्रांति ,नेता में देश भक्ति ढूँढ़ते रहे जायोगे  अरिहंतों की वाणी ,गुरुओं में ज्ञानी ,सेठों में दानी  ढूँढ़ते रहे जायोगे  राजपूतों  की आन ,लखनवी शान ,क्षत्रियों की जबान  ढूँढ़ते रहे जायोगे सत्य के लिए युद्ध ,पर्यावरण  में हवा शुद्ध ,धरम गुरुओं में बुद्ध ढूँढ़ते रहे जायोगे विज्ञापनों की कतार में ,अखबारों में न्यूज़ ,विज्ञापनों मेंसच्चाई  मानवों के मकड़ जाल में इंसानियत की परछाई  ढूँढ़ते रहे जायोगे

अनवरत प्रश्न

अभय हो जीने की कला  सीख पायेगा ? चक्रव्यूह   विचारों के हैं बुने अभिमन्यु भी  बन पायेगा ? द्रोण ही आहुति मांग रहे हैं अपने शिष्यों की ? छलावे का शिकार एकलव्य बन कर ही रहे जाएगा  या कभी अर्जुन भी बन पायेगा ? शकुनी के चालों  में क्या मौन  भीष्म प्रतिज्ञा रख पायेगा ? आक्षेप रहित वीरों  का क्या  एक इतिहास क्या रच पायेगा ? सर्वत्र हो शांति  क्या ऐसा स्वप्न दुकूल भी बुन पायेगा?  जवाब रहित अनवरत प्रश्न क्या सही हल दे पायेगा?

नारी। कविता

 नारी मैं ना किसी से हारी  हूँ  ये आज समझने पाई हूँ , दुर्बलता मैं नारी हूँ प्रकृति के सुकुमार अवयव लेकर  मैं सबसे  हारी हूँ  जयशंकर प्रसाद  ( ये पंक्तिया  पढ़कर मुझे ये लगा नहीं स्त्रियों का मतलब दुर्बलता तो हरगिज नहीं हो सकता है . तो मैंने इन पंक्तियों के प्रत्यूतरमें ये कविता लिखी ) कौन कहता है ,मैं दुर्बलता मैं नारी हूँ  मैं न किसी से हारी थी ,ना किसी से हारी  हूँ  मेरा ध्येय केवल सीता नहीं, मेरा आधार केवल अहिल्या नहीं मेरा रूप केवल मेनका नहीं मेरी नियति केवल सती नहीं  मैं  तो हूँ  इन्द्रा भी  नूर जहाँ भी  मैं  जेबूनिसा भी मैं  हूँ पुतली बाई भी  मेरे जिस्म पे दिए गर जख्म तो मैं  बन जाऊंगी जख्मी शेर  मत ललकारो मुझे नहीं तो मैं  बन आऊँगी समक्ष तेरे लक्ष्मी  रजिया पुतली नूर हिम्मत मत करना मेरे सतीत्व  के स्पर्श का, मैं पद्मिनी का इतिहास  दोहरा दूँगी लांछन  मत लगाना मै  विश्व में आग लगा दूँगी  ...

डायरी का पन्ना

डायरी का पन्ना  यूँ मैंने कई लम्हे बिता दिए  जिस चाहत में आज मिल गई तो अधूरी सी  क्योँ लगती है ?. सच है ये जीवन ख्वाबों  का अँधा ढेर है .किसी के सिर्फ आँखों में पलते किसी के फलते है  पर अक्सर  इतनी देर हो जाती है पलने और फलने में की मिल कर भी कुछ  कमी रहती है  मैं निराशावादी नहीं हूँ  ,जीत चुकी हूँ अपने भीतर की जंग कई दफे, पर क्या करूँ ? जीतने की जद्दोजहद  में कई बार जो  रुसवाई हुई खुद से खुद की  वो भूले नहीं भूलती है आदमी परायों से लड़े तो एक अलग बात , अपनों से लड़ने पर एक कसक रहती है  हंसने का मौखुटा तो दिन भर लगा ही रखा है .पर डायरी के पन्नो पर नकली हंसी  जमती नहीं  यु  ज़माने भर की तल्खियों का सामना किया ,पर तीर्थ  की उम्र में ये दुनियादारी निभती नहीं चलो एक बार और  निभालेते है रस्मोजिंदगी ,यूँ फूलो की सेज हर किसी के नसीब में  होती नहीं

हाउजी बनाम शहर

हाउजी बनाम हमारा  शहर  ( ये एक मनोरंजन है मनोरंजन के सिवाय कुछ नहीं .दिल पे मत लेना यार . इसके सारे आंकड़े हाउजी के नंबर के हिसाब से है  इसमें कोई सत्यता नहीं ) हमारे नगर की क्या यही पहचान है ? ३६ गढ़ की क्या बन पाई शान है . सड़ी नालियाँ  ५६ धारा,बिखरी सी जीवन धारा  सड़के जिसमे गढ़े ५० -६० 1, १० दिशाओं ४रों ओर बिखरी सड़ांध .1 ५-२५ करते रह गए, १९ २० के चक्कर में  खाई ६५ या पछाड़ ,  ३, पूल की लचर  हालत, ८२-८४ माह से बन rahi जाने कब बनेगी , लग गई पूरी लागत. बनने चले ६ बे जी बन गए २ बे जी  अभी थोड़े दिनों पहले की बात बताती हूँ  ,आँखों देखी सुनाती हूँ  लालकृष्ण  अडवानी थे , आने वाले ,१५, दिन में जोर शोर से श्री कान्त वर्मा मार्ग की सड़क हो गई आनन-फानन तैयार  . गौर फरमाएं  सिर्फ ७, दिन बाद ही होने लगी टाइल्स गायब .३२ दिनों में बैंच गायब,, नजारा  अजब सड़क की गजब कहानी था , ५७ दिनों में तो फुटपाथ  ही टूट रही थी .पूछा भाई नई सड़क तोड़ रहे हो क्या है . ,माजरा ? बोले बड़े भोलेपन से सड़क बनाने की जल्दी में नाले बनाने भूल गए...

पहेलिया

पहेलिया     १. गहना पहना क्यों  नहीं ,पानी पिया क्यों नहीं? २.जूता पहना क्यों नहीं समोसा खाया क्यों  नहीं ? ३. घर में माँ ने डांटा क्यों? स्कूल में टीचर ने डांटा क्यों? ४. इंग्लिश वर्ण माला में सबसे ढंडा वर्ण कौनसा है ? ५.शोले पिक्चर में डबल  रोल किसका था ? ६.एक ही चीज है उसे यदि  भूख  लगे तो खा लेना, प्यास लगे तो  पी लेना , ठण्ड लगे तो जला लेना ? ७.कौनसा पुलाव है ,जो नहीं खा सकते ?. ८. राम सीता हे तो राम कौन है ? ९. भारत की पहली विदेश यात्री महिला? १० एक एसी चिड़िया जिसके सर  पर पैर है? ११.बिना मात्रा का एक शहर ? १२एक सब्जी  और एक खाने की चीज जिसे गाली देते हुए संबोधित करते है ? १३. महिलाओं को सबसे अच्छी बुक कौन सी लगती है ?  १४. एक एसी भाषा जो उलटी सीधी एक सामान हो  o o o o o o o o o o o १. घड़ा नहीं था  २. टला नहीं था  ३.लेट गया था  ४. B ५. सिक्का  ६.नारियल  ७.ख्याली  पुलाव  ८.दर्जी ९.सीता  १०.प्रत्येक  चिड़िया (क्योंकि सब के सर , पर , और पैर होते है ) ११अह्म...

समनी वृन्द को भाव भीनी विदाई

समनी वृन्द को भाव भीनी  विदाई  (स्वागत जहाँ आह्राल्द्कारी होता है  ,विदाई सदैव कष्टकारी  होती है ,हम भाव पूर्ण ह्रदय से विदाई देते हुए   उन सार्थक क्षणों को याद करते है, कि आप द्वारा की गई ज्ञान वृष्टि सें हम कितने ओतप्रोत हुए, कितने  वो साधारण से दिन आपके सानिध्य से अमुलिय हो गए  और ये यादे  ही हमारी बहुमुलिय थाती  बन गई ) सोये श्रावको को आप जगाने आ गए  ज्ञान के दीप जलाने आ  गये  ज्ञान धर्म में व्यवहारकी शिक्षा आपकी मन को प्रेरणा देती रही  आपके साथ आगम की  स्वर -लहरी चलती  रही  आप का साथ मन को बहुत भा गया  और मिले साथ ये ज्ञान पिपासा बढा गया  हमारे पुण्य  के प्रतिफल आप जैसे गुरुओं  का साथ मिला  दुर्लभ मोक्ष मार्ग पाने का,  किंचित  आधार मिला  संयम गुण विद्या ख्याति और अंतर्बल है  ऐसी  ज्ञान से परिपूर्ण समनिजियो को  मेरा शत शत वंदन है (जाते वक़्त विदाई में कुछ देने का  दस्तूर होता है    तो  हम  भी ये  दस्तूर...