जैन रामायण प्रश्न
टॉपिक,,जैन रामायण
*रामचंद्रजी को सीताजी के अलावा और कितनी पत्नियां थी? उनके नाम?*
🅰️ *Answer*
*रामचंद्रजी को सीताजी के अलावा 3 पत्नियां थी।*
A 1) प्रभावती
2) रतिनिभा
3) श्रीदामा
✨✨✨✨✨✨✨
*
राजा मधु को प्रेक्षापाशस्त्र किसने दिया
चरमेंद्र जी ने
1️⃣ राजा दशरथ जी के पिता जी का नाम क्या था ?
🅰️ अनरण्य राजा जी ।
2️⃣ राजा दशरथ जी के माताजी का नाम क्या था ?
🅰️ पृथ्वीदेवी जी ।
3️⃣ राजा दशरथ जी के बड़े भाई का नाम क्या था ?
🅰️ अनंतरथ जी ।
अनरण्य राजा जी किससे दीक्षित हुए
A अभय सेन मुनि जी
दशरथ जी का दूसरा नाम
क्षीर कण्ठ
4️⃣ राजा दशरथ जी के पिताजी के कल्याण मित्र का नाम क्या था ?
🅰️ सहस्रकिरण जी ।
मृत्यु पश्चात हनुमान जी कौन सी गति में गए
हनुमान जी मोक्ष गए है
5️⃣ राजा दशरथ जी के मित्र का क्या अभिग्रह ( प्रतिज्ञा ) था ?
🅰️ दोनों मित्र साथ में संयम लेंगे ।
6️⃣ राजा दशरथ जी का राज्यअभिषेक हुआ था तब वे कितने वर्ष के थे ?
🅰️ एक महिने के ।
7️⃣ राजा दशरथ जी के कल्याण मित्र किस राज्य के राजा थे ?
🅰️ माहिष्मति के राजा थे।
8️⃣ राजा दशरथ जी की पत्नी कौशल्या देवी जी का दूसरा नाम क्या था ?
🅰️ अपराजिता जी ।
9️⃣ कौशल्या देवी जी की माताजी का नाम क्या था ?
🅰️ अमृतप्रभा जी ।
रावण के सास -ससुर का क्या नाम था ?
यानी मंदोदरी के माता पिता का नाम
Aमयराजा हेमवती रानी
1️⃣0️⃣ राजा दशरथ जी की दूसरी पत्नी का नाम क्या था ?
🅰️ सुमित्रादेवी जी ।
1️⃣1️⃣ राक्षस वंश में जन्में प्रतिवासुदेव जी का नाम क्या था ?
🅰️ रावणजी ।
1️⃣2️⃣ नैमेत्तिक की भविष्यवाणी सुनकर किसको क्रोध आया था?
🅰️ विभीषण जी को।
1️⃣3️⃣ विभीषण जी ने जब प्रतिज्ञा ली तो उस समय राज सभा में कौन उपस्थित थे ?
🅰️ नारदजी।
1️⃣4️⃣ श्री सीमंधर स्वामीजी तीर्थंकर की दीक्षा महोत्सव किस नगरी में हुआ ?
🅰️ पुंडरीकगिरी नगरी में।
1️⃣5️⃣ साधर्मिक भत्ति से ओतप्रोत कोन थे ?🅰️ नारदजी।
1️⃣6️⃣ विभीषण जी ने किन किन को मारने की प्रत्तिज्ञा ली थी ?
🅰️ दशरथ जी और जनकराजा जी को ।
1️⃣7️⃣ मृत्यु से बचने के लिए अयोध्या में मंत्रीयो ने राजा को क्या सलाह दी ?
🅰️ योगी जैसे वस्त्र परिधान करके एकाकी वन में चले जाइये ।
1️⃣8️⃣ मंत्रीयो ने लेप्यमय मूर्ति में रत्त समान दिखने वाला क्या भरा था ?
🅰️ लाक्षा रस भरा ।
1️⃣9️⃣ युवराज द्रोणमेघ की बहिन राजकुमारी का नाम क्या था ?
🅰️ कैकयी जी ।
2️⃣0️⃣ कौतुकमंगल नगर के राजा का नाम क्या था ?
🅰️ शुभमतिजी राजा।
2️⃣1️⃣ कैकेयी जी ने दशरथ जी के गले में क्या पहना थी ?
🅰️ वरमाला ।
2️⃣2️⃣ स्वयंवर मण्डप में क्रोध से कौन तमतमा उठे थे ?
🅰️ हरिवाहन आदि राजा।
2️⃣3️⃣ राजा दशरथ जी के रथ की सारथी कौन बनी थी ?
🅰️ कैकेयी जी ।
2️⃣4️⃣ राजा दशरथ जी ने प्रसन्न होकर कैकेयी से क्या मनचाहा मांगने को कहा था ?
🅰️ वरदान ।
2️⃣5️⃣ सेना सहित दशरथ जी किस नगरी में आते थे ?
🅰️ राजगृही नगरी में।
2️⃣6️⃣ राजा दशरथ जी ने दूत भिजवाकर अयोध्या से अपनी कितनी रानियों को बुलवाया था ?
🅰️ तीनों रानियों को।
2️⃣7️⃣ राजा दशरथ जी किस भय के कारण अपनी अयोध्या नहीं जा रहें थे ?
🅰️ रावण जी के भय से।
2️⃣8️⃣ कौशल्या जी ने कितने सपने देखें थे ?
🅰️ चार ।
2️⃣9️⃣ कौशल्या जी ने कौन-कौन से सपने देखे थें ?
🅰️ हाथी , सिंह , चन्द्रमा , सूर्य ।
3️⃣0️⃣ कौशल्या जी ने सपनों का फल किस्से पूछा था ?
🅰️ राजा दशरथ जी ।
सुग्रीव और विभीषण को किसे देख के वैराग्य हुआ?
राम जीकी मृत्यु देख
जो -----उठायेगा वोहीरावण को मार सकेगा
कोटिशिला
सीता ने हनुमान जी को अपने स्मृति चिन्ह के रूप में
चूड़ा मणि दी।
दशरथ औऱ उनके अनेक सामन्त
ने आचार्य भूतशरण के पास दीक्षा ली
मुनि अप्रमेय से मंदोदरी कुम्भ करण ,आदि ने
दीक्षा ली।
सीता जी की सौतनो ने षड्यंत्र रचे
राम द्वारा निष्कासित सीता कौन शहर गई
पुंडरिक पुर
निष्कासित सीता को वन में कौन मिले
वज्रजंघउसे धर्म भाई बनाया
राम छः महीने लक्ष्मण की मृत देह को उठा कर
कंधे पर रखे।
सीता जी ने सर्व गुप्ति मुनि से दीक्षा स्वीकार की
🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹
🌹🌹आज मेरी क्लास है 🌹🌹
🌹🌹विषय -जैन रामायण पर आधारित प्रश्नोत्तरी 🌹🌹
🌹1⃣ जैन रामायण के प्रथम रचयिता कौन है⁉
🅰 कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्र सूरि जी महाराज
🌹2⃣ रामायण की रचना कौन से तीर्थंकर के समय में हुई?⁉
🅰 20वें तीर्थंकर श्री मुनि सुव्रत जी
🌹3⃣ हेमचन्द्राचार्य का जन्म नाम क्या था⁉
🅰 चांगदेव
🌹4⃣ राक्षस कुल की उत्पत्ति कौन से राजा के द्वारा हुई⁉
🅰 राजा मेघवाहन द्वारा़(तीर्थंकर चारित्र में धनवाहन राजा है)
🌹5⃣ राजा मेघवाहन (धनवाहन) के पुत्र का नाम क्या है⁉
🅰 महाराक्षस
🌹6⃣राक्षस द्वीप की राजधानी कौन सी थी⁉
🅰 लंका
🌹7⃣ राक्षस कुल की उत्पत्ति कौन से तीर्थंकर के समय में हुई ⁉
🅰 2रें तीर्थंकर अजितनाथ जी के समय में
🌹8⃣ श्रेयांसनाथ जी के समय में लंका का राजा कौन था ⁉
🅰 राजा कीर्तिधवल
🌹9⃣ कीर्तिधवल राजा की पत्नी का नाम क्या था ⁉
🅰 देवी
🌹🔟 किसकी युद्ध यात्रा विवाह यात्रा में बदली⁉
🅰 पुष्पोत्तर
🌹1⃣1⃣ वानर द्वीप कितने योजन प्रमाण था ⁉
🅰 300 योजन
🌹1⃣2⃣ रामायण में किस नगरी व पर्वत का एक जैसा नाम था⁉
🅰 किषिकन्धा नगरी और किषिकन्धा पर्वत
🌹1⃣3⃣वासुदेव का जन्म पहले हुआ था या प्रतिवासुदेव का⁉
🅰 प्रतिवासुदेव का
🌹1⃣4⃣ मुनिसुव्रत स्वामी के समय में वानरद्वीप पर कौन से राजा का शासन था ⁉
🅰 धनोदधिरथ राजा
🌹1⃣5⃣ रावण के माता पिता का क्या नाम था ⁉
🅰 केकसी -रत्नश्रवा जी
🌹1⃣6⃣ रावण के दादा -दादी का क्या नाम था ⁉
🅰 सुमाली-प्रीतिमति
🌹1⃣7⃣ रावण के नाना का नाम क्या था ⁉
🅰 व्योमबिन्दु
🌹1⃣8⃣ रावण की मौसी कहाँ रहती थी⁉
🅰 यक्षपुर
🌹1⃣9⃣ रावण का दूसरा नाम क्या था ⁉
🅰 दशानन /दशमुख
🌹2⃣0⃣कुम्भकर्ण का दूसरा नाम क्या था ⁉
🅰 भानुकर्ण
🌹2⃣1⃣ रावण कुंभकर्ण तथा विभीषण तीनों भाइयों ने कौन से वन में विद्या प्राप्त की थी ⁉
🅰 भीमा अरण्य में
🌹2⃣2⃣ रावण कितनी विद्याओं का स्वामी था⁉
🅰 एक हजार विद्याओं का
🌹2⃣3⃣ रावण की पटरानी कौन थी⁉
🅰 मंदोदरी
🌹2⃣4⃣ रावण का कौन सा भाई चरम शरीरी था⁉
🅰 वैश्रवण
🌹2⃣5⃣ रावण के पास कौन सा विमान था⁉
🅰 पुष्पक
🌹2⃣6⃣ रावण जिस हाथी पर सवारी करता था उसका क्या नाम था ⁉
🅰 भुवनालंकार
🌹2⃣7⃣ रावण को भुवनालंकार हाथी कौन से शिखर पर मिला⁉
🅰 सम्मेत शिखर पर
🌹2⃣8⃣ रावण की बहन और बहनोई का क्या नाम था ⁉
🅰 चंद्रनखा - खर
🌹2⃣9⃣ परस्त्री की बिना इच्छा उसका स्पर्श नहीं करूँ ऐसा संकल्प किसने किया ⁉
🅰 रावण ने
🌹3⃣0⃣ रावण की पुत्री का क्या नाम था ⁉
🅰 मनोरमा
सीता का पुर्व भव में नाम वेगवती था
उन्होंने मुनि सुदर्शन पर झूठा कलंक लगाया ।
भामण्डल जी को चंद्रगति ने पुत्रवत पाला था।
जटायू का अपर नाम
जटायुध
चंद्रनखा के पति का नाम खर दूषण था
चंद्रनखा के पुत्र का नाम शम्बूक था।
जो लक्ष्मण के हाथों मारा गया
🌞जैन रामायण पर आधारित प्रश्न-उत्तर 🌞
🔒1⃣ जैन रामायण के रचयिता कौन है❗❓
🔑1⃣ कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्र सूरीश्वरजी❗
🔒2⃣ रामायण कौन से तीर्थंकर के समय हुई थी❗❓
🔑2⃣ भगवान मुनिसुव्रत जी के समय❗
🔒3⃣ राक्षस वंश के प्रवर्तक कौन है❗❓
🔑3⃣ मेघवाहन नरेश❗
🔒4⃣ वानर वंश की उत्पत्ति कब हुई थी❗❓
🔑4⃣ भगवान श्रेयांसनाथ जी के शासन में❗
🔒5⃣ कौन से मामा भांजा चतुर्थ नरक में गए❗❓
🔑5⃣ मामा -रावण ,भांजा- शंबूक❗
🔒6⃣ रावण के माता पिता का नाम क्या था❗❓
🔑6⃣ माता कैकसी, पिता रत्न श्रवा❗
🔒7⃣ वचन से वियोग किसे सहना पड़ा❗❓
🔑7⃣ अंजना एवं द्रोपदी सती को❗
🔒8⃣ हनुमान जी का जन्म कब हुआ था❗❓
🔑8⃣ श्रवण नक्षत्र में चैत्र कृष्णा पूर्णिमा को ब्रम्ह योग में❗
🔒9⃣ वरुण राजा को किसने बंदी बनाया था❗❓
🔑9⃣ लंकापति रावण ने❗
🔒🔟 पुत्र प्राप्त होते ही संसार का त्याग करूंगा ऐसा संकल्प किसने किया था❗❓
🔑🔟 अयोध्या नरेश कीर्ति ध्वज ने❗
🔒1⃣1⃣ श्रीराम ने गुरु के सानिध्य में रहकर कितने वर्ष साधना की थी❗❓
🔑1⃣1⃣ 60 वर्ष तक❗
🔒1⃣2⃣ राम-लक्ष्मण का जन्म कहां हुआ था❗❓
🔑1⃣2⃣ मगध देश की राजगृही में❗
🔒1⃣3⃣ भरत-शत्रुघ्न का जन्म कहां हुआ था❗❓
🔑1⃣3⃣ कौशल देश की
अयोध्या में❗
🔒1⃣4⃣ राम को कितनी वीमाताएं थी❗❓
🔑1⃣4⃣ 3
🔒1⃣5⃣ कौन सा भाई अज्ञानतावश बहन के स्वयंवर में उसे प्राप्त करने गया था❗❓
🔑1⃣5⃣ भामंडल कुमार सीता को प्राप्त करने❗
🔒1⃣6⃣ जनक राजा कौन से भाव में मांस भक्षी थे❗❓
🔑1⃣6⃣ भूरी नंदन राजा के प्रथम भव में❗
🔒1⃣7⃣ राम लक्ष्मण एवं सेना ने स्त्री रूप धारण करके किस से युद्ध किया था❗❓
🔑1⃣7⃣ नंदाआवर्त पूर के राजा अति वीर्य से❗
🔒1⃣8⃣ श्री राम को देखकर किस की कामपीड़ा जागृत हुई थी❗❓
🔑1⃣8⃣ चंद्रनखा की❗
🔒1⃣9⃣ हिरण पर आसक्त होने से किसका हरण हुआ था❗❓
🔑1⃣9⃣ सीता सती का❗
🔒2⃣0⃣ रावण ने सीता की देखभाल करने किसे नियुक्त किया था❗❓
🔑2⃣0⃣ त्रिजटा दासी को❗
🔒2⃣1⃣ पति वियोग से सीता ने कितने उपवास किए थे❗❓
🔑2⃣1⃣ 21 दिन के उपवास❗
🔒2⃣2⃣ जोगी बनकर जान किसने गवाई ❗❓
🔑2⃣2⃣ रावण ने❗
🔒2⃣3⃣ कौन सी विद्या द्वारा भूत भविष्य वर्तमान की बात जानी जा सकती है❗❓
🔑2⃣3⃣ अवलोकिनी विद्या द्वारा❗
🔒2⃣4⃣ सीता ने कौन से दो युगल पुत्रों को जन्म दिया था❗❓
🔑2⃣4⃣ अनंग लव एवं मंदना कुश❗
🔒2⃣5⃣ ससुराल में जन्म लेने वाले दामाद कौन थे❗❓
🔑2⃣5⃣ लव कुमार❗
🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀🏆🚴♀
*विनोद जैन* 920
*महावीर के उपदेश ग्रुप*
जबाब इस नंबर पर भेजने हे
✍🏾 *09673597005*
️️️️️️
जैन रामायण प्रश्न उत्तर
🅿️2️⃣🏆 मेघवाहन राजा के पुत्र का नाम ⁉️
🅰️🏆 महारक्ष
🅿️3️⃣🏆 श्री कंठ ने किसका अपहरण किया ⁉️
🅰️🏆 पद्मा का
🅿️4️⃣🏆 अतिन्द्र विध्याधर की पत्नी का नाम
🅰️🏆 श्रीमती
🅿️5️⃣🏆 तडित्केश की पत्नी का नाम ⁉️
🅰️🏆 चन्द्रा
🅿️6️⃣🏆 कुंभ कर्ण की पत्नी का नाम ⁉️
🅰️🏆 तडिन्माला
🅿️7️⃣🏆 विभीषण की पत्नी का नाम ⁉️
🅰️🏆 पंकज श्री
🅿️8️⃣🏆 चन्द्रनखा का किसके साथ विवाह हुआ ⁉️
🅰️🏆 खर
🅿️9️⃣🏆खर के पिता का नाम ⁉️
🅰️🏆 मेघप्रभजी
🅿️1️⃣0️⃣🏆 रावण ने हाथी का क्या नाम रखा ⁉️
🅰️🏆 भुवनालंकार
🙋🏻♀
प्रश्न ४६० -सीता ने रावण के यहाँ रहकर कितने दिन उपवास किया था ?
उत्तर -११ उपवास लगातार।
प्रश्न ४६१ -पुन: उसने किसके यहाँ का भोजन लिया था ?
उत्तर -विभीषण के यहाँ।
🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹उत्तर -विभीषण के यहाँ।
🌹🌹आज मेरी क्लास है 🌹🌹
🌹🌹विषय -जैन रामायण पर आधारित प्रश्नोत्तरी 🌹🌹
🌹1⃣ जैन रामायण के प्रथम रचयिता कौन है⁉
🅰 कलिकाल सर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्र सूरि जी महाराज
🌹2⃣ रामायण की रचना कौन से तीर्थंकर के समय में हुई?⁉
🅰 20वें तीर्थंकर श्री मुनि सुव्रत जी
🌹3⃣ हेमचन्द्राचार्य का जन्म नाम क्या था⁉
🅰 चांगदेव
🌹4⃣ राक्षस कुल की उत्पत्ति कौन से राजा के द्वारा हुई⁉
🅰 राजा मेघवाहन द्वारा़(तीर्थंकर चारित्र में धनवाहन राजा है)
🌹5⃣ राजा मेघवाहन (धनवाहन) के पुत्र का नाम क्या है⁉
🅰 महाराक्षस
🌹6⃣राक्षस द्वीप की राजधानी कौन सी थी⁉
🅰 लंका
🌹7⃣ राक्षस कुल की उत्पत्ति कौन से तीर्थंकर के समय में हुई ⁉
🅰 2रें तीर्थंकर अजितनाथ जी के समय में
🌹8⃣ श्रेयांसनाथ जी के समय में लंका का राजा कौन था ⁉
🅰 राजा कीर्तिधवल
🌹9⃣ कीर्तिधवल राजा की पत्नी का नाम क्या था ⁉
🅰 देवी
🌹🔟 किसकी युद्ध यात्रा विवाह यात्रा में बदली⁉
🅰 पुष्पोत्तर
🌹1⃣1⃣ वानर द्वीप कितने योजन प्रमाण था ⁉
🅰 300 योजन
🌹1⃣2⃣ रामायण में किस नगरी व पर्वत का एक जैसा नाम था⁉
🅰 किषिकन्धा नगरी और किषिकन्धा पर्वत
🌹1⃣3⃣वासुदेव का जन्म पहले हुआ था या प्रतिवासुदेव का⁉
🅰 प्रतिवासुदेव का
🌹1⃣4⃣ मुनिसुव्रत स्वामी के समय में वानरद्वीप पर कौन से राजा का शासन था ⁉
🅰 धनोदधिरथ राजा
🌹1⃣5⃣ रावण के माता पिता का क्या नाम था ⁉
🅰 केकसी -रत्नश्रवा जी
🌹1⃣6⃣ रावण के दादा -दादी का क्या नाम था ⁉
🅰 सुमाली-प्रीतिमति
🌹1⃣7⃣ रावण के नाना का नाम क्या था ⁉
🅰 व्योमबिन्दु
🌹1⃣8⃣ रावण की मौसी कहाँ रहती थी⁉
🅰 यक्षपुर
🌹1⃣9⃣ रावण का दूसरा नाम क्या था ⁉
🅰 दशानन /दशमुख
🌹2⃣0⃣कुम्भकर्ण का दूसरा नाम क्या था ⁉
🅰 भानुकर्ण
🌹2⃣1⃣ रावण कुंभकर्ण तथा विभीषण तीनों भाइयों ने कौन से वन में विद्या प्राप्त की थी ⁉
🅰 भीमा अरण्य में
🌹2⃣2⃣ रावण कितनी विद्याओं का स्वामी था⁉
🅰 एक हजार विद्याओं का
🌹2⃣3⃣ रावण की पटरानी कौन थी⁉
🅰 मंदोदरी
🌹2⃣4⃣ रावण का कौन सा भाई चरम शरीरी था⁉
🅰 वैश्रवण
🌹2⃣5⃣ रावण के पास कौन सा विमान था⁉
🅰 पुष्पक
🌹2⃣6⃣ रावण जिस हाथी पर सवारी करता था उसका क्या नाम था ⁉
🅰 भुवनालंकार
🌹2⃣7⃣ रावण को भुवनालंकार हाथी कौन से शिखर पर मिला⁉
🅰 सम्मेत शिखर पर
🌹2⃣8⃣ रावण की बहन और बहनोई का क्या नाम था ⁉
🅰 चंद्रनखा - खर
🌹2⃣9⃣ परस्त्री की बिना इच्छा उसका स्पर्श नहीं करूँ ऐसा संकल्प किसने किया ⁉
🅰 रावण ने
🌹3⃣0⃣ रावण की पुत्री का क्या नाम था ⁉
🅰 मनोरमा
रेखा जैन नादौन (हिमाचल प्रदेश )
राम : दीक्षा लेकर उसी भव में “सिद्धपद” की साधना करते हुए, केवल ज्ञान पाकर “मोक्ष” गए.
सीता: दीक्षा लेकर घोर तप करके १२वे देवलोक में “प्रतिंद्र” के रूप में उत्पन्न हुई.
देवलोक में रहते हुए श्री राम को “ध्यानमग्न” देखा. उनके साथ “धर्मचर्चा” करने की “इच्छा” जागी. “देवलोक” से “सीता” का रूप धारण करके उन्हें “उपसर्ग” किया किन्तु श्री राम विचलित नहीं हुवे. “राम” ध्यान में आगे बड़े….और “केवल ज्ञान” पाया.
तब सीता ने माफ़ी मांगी और लक्ष्मण और रावण के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की. श्री राम ने बताया कि लक्ष्मण “चौथी नरक” में है और “रावण” “तीसरी नरक” में.
चूँकि कोई भी देव “तीसरी नरक” से आगे नहीं जा पाता इसलिए “देव” (सीता) ने “तीसरी नरक” जाकर “रावण” को “प्रतिबोध” दिया.
आगे के भव:
१. “सीता” के कारण लक्ष्मण और रावण दोनों नरक से निकलकर मनुष्य और तिर्यंच के अनेक भव करते हुवे हर बार एक दूसरे को मारेंगे. इसलिए बार बार नरक में जाएंगे. अंत में नरक से निकलकर (कर्म भोगकर) सगे भाई बनेंगे जिनमें अत्यंत प्रेम होगा.
२. फिर देवलोक में उत्पन्न होंगे.
३. फिर साथ में “मनुष्य” का जन्म लेंगे.
४. फिर देवलोक में
५. फिर साथ में “राजपुत्र “(मनुष्य का जन्म लेंगे) बनेंगे. दीक्षा लेंगे.
६. फिर साथ में ७वे देवलोक में
७. अब “सीता” का जीव “भारत क्षेत्र” में “चक्रवर्ती” बनेगा. रावण और लक्ष्मण के जीव उनके “इंद्ररथ” और “मेघरथ” नाम के पुत्र बनेंगे.
८. तीनों मरकर अनुत्तर विमान में अहींद्र होंगे.
९. वहां से निकलकर “रावण” तीर्थंकर और “सीता” का जीव उनका “गणधर” बनेगा. लक्ष्मण का जीव “घातकी खंड” में चक्रवर्ती के साथ “तीर्थंकर” बनेगा.
विशेष:
जिस “रावण” ने “कुबेर” की पट्टरानी “उपरंभा”को वापस भेजा और वही “शीलवान” सीता के “रूप” के आगे हार गया.
जिस “रावण” ने “कुबेर” की पट्टरानी “उपरंभा”को वापस भेजा और वही “शीलवान” सीता के “रूप” के आगे हार गया.
कर्म की कैसी विचित्रता है!
हम कर्म कैसे कर रहे हैं, क्या अब भी उन्हें “समझना” नहीं चाहेंगे ?
🌹जैन ज्ञान दर्शन ग्रुप🌹
लक्ष्मण को बचाया था रावण ने? : रावण के राज्य में सुषेण नामक प्रसिद्ध वैद्य था। जब लक्ष्मण सहित कई वानर मूर्छित हो गए तब जामवंतजी ने सलाह दी की अब इन्हें सुषेण ही बचा सकते हैं। रावण की आज्ञा के बगैर उसके राज्य का कोई भी व्यक्ति कोई कार्य नहीं कर सकता। माना जाता है कि रावण की मौन स्वीकृति के बाद ही सुषेण ने लक्ष्मण को देखा था और हनुमानजी से संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा था।
🙏🙏🙏🙏🙏
1. कौनसे राजा के कारण राक्षस वंश नाम पड़ा??
A. मेघवाहन राजा के कारण
2. किस कारण पड़ा??
A. राक्षसी विद्या सिद्ध करने के कारण
3, विद्याधर राजा की स्थापना कब हुई??
A. ऋषभ देव प्रभु की दीक्षा के बाद
4. एक योजन कौन चलते है??
A. चक्रवती
5. राक्षस वंश की उत्तप्ति किस तीर्थंकर के समय हुई??
A. अजितनाथ जी
6. भरत क्षेत्र की दो महान नदियां??
A. गंगा सिंधु
7. कौनसे देव ने48000विद्या दी??
A. धरणेन्द्र देव
8. कौनसी विधा दी??
A. गौरी विज्ञप्ति आदि
9. विद्या के बल पर कौनसा विमान बनाया??
A. पुष्पक विमान
10. ऋषभ प्रभु के पारने से पूर्व कितने को स्वप्न आये??
A. 3
11. कौन कौन को स्वप्न आये??
A. सोमप्रभ श्रेयांश कुमार सुबुद्धि सेठ को
12. किस का स्वप्न फलित हुआ??
A. श्रेयांश कुमार जी
13. रावण के विमान का नाम??
A. पुष्पक विमान
14. विद्या के बल पर पुष्पक विमान किसने बनाया??
A. नमी विनमी जी
15. राक्षस जाति के हार मेकितनी मणिया थी??
A. 9
16. किस राजा को हार दिया??
A. मेघ वाहन राजा
17. किसने हार दिया??
व्यन्तर जाति के देव
18. किस देव ने दिया??
A. राक्षस निकाय केइन्द्रभीमदेव ने
19. कितने उपवास से एक खड्ग सिद्ध होता??
A. 6
20. छ उपवास से कोंनसा खड्ग सिद्ध होता है??
A. चन्द्र हास्य खड्ग
21. एक माह में कितने पौषध करने चाहिए??
A. 4
22. किस दिन होते है??
A. 8 14अमावस्या पूर्णिमा
23. पौषध क्या है??
A. साधु की तरह समयसीमा रूप छोटी सामायिक
24. कुम्भकर्ण की मृत्यु किस के द्वारा हुई??
A. सुदर्शन चक्र
25. कुम्भकर्ण की साधना का वर किस तरह परिवर्तित हुआ और क्या वर मांगा??
A. सरस्वती देवी का जिह्वा पर विराजमान होना निद्रासन का मांगना
रावण का दिग्विजय और वैश्रमण का प्रव्रज्या ग्रहण
लंका नगरी पर वैश्रमण का राज्य था। अपने पूर्वजों के राज्य पर से पिता को हटा कर राज्य करने वाला वैश्रमण, अब रावण आदि भ्रातृ-मण्डल को खटक रहा था।
कुंभकर्ण और विभीषण लंका में उपद्रव करने लगे। उनके उपद्रव से प्रभावित हो कर वैश्रमण ने अपना दूत, सुमाली के पास भेज कर कहलाया;
"तुम्हारे पुत्र कुंभकर्ण और विभीषण लंका में आ कर उपद्रव कर रहे हैं। इन मूर्ख बालकों को रोको । यदि तुमने इन्हें नहीं रोका, तो उन्हें और उनके साथ तुम्हें भी
माली के मार्ग-मृत्यु की ओर पहुंचा दिया जायगा । ये उदंड छोकरे हमारी शक्ति नहीं जानते, किंतु तुम तो हमारे बल से पूर्ण परिचित हो । अत एवं समझ जाओ और अपनी पाताल-लंका में चुपचाप पड़े रहो।
दूत की इस प्रकार की अपमान-कारक बात सुन कर रावण कोधित हो गया और कहने लगा;
वह वैश्रमण किस बल पर घमण्ड कर रहा है ? बिचारा खुद दूसरे के आधीन हो कर पड़ा है और कर दे कर राज कर रहा है । उसे लज्जा आनी चाहिए । जा दूत तू उस धीठ को कह दे कि अब तेरा शासन लंका पर नहीं रह सकेगा।
दूत को चलता करने के बाद रावण आदि तीनों भाई सेना ले कर लंका पर चढ़ आये । वैश्रमण भी सेना ले कर लंका के बाहर आ कर रावण से जूझने लगा। थोड़ी देर के युद्ध से ही वैश्रमण की सेना का साहस टूट गया। वह भागने लगी । वैश्रमण ने देखा-'अब विजय रावण को वरण कर रही है । ऐसी दशा में अपमानित हो कर संसार में
रहने की अपेक्षा राज्य-मोह त्याग कर मोक्ष-मार्ग की ओर प्रयाण करना ही उत्तम मार्ग है । यह श्रेष्ठ मार्ग ही पराजय की लज्जा एवं अपमान से रक्षा कर के ऊच्च स्थान प्रदान
करने वाला है। राज्य-लिप्सा, बिना विराग के शान्त नहीं होती और जब तक शांत नहीं होती, तब तक वैर-विरोध विग्रह एवं दुर्गति की सामग्री जुटती ही रहती है । उस समय मेरा पलड़ा भारी था, आज इनका पलड़ा भारी है । यह कर्म की उठा-पटक चलती ही रहती है । इसका छेदन करने के लिए निग्रंथ मार्ग का अनुसरण करना आवश्यक है, "-
इस प्रकार विचार कर के वैश्रमण ने शस्त्र डाल दिये और युद्ध भूमि से पृथक् हो कर स्वयमेव प्रव्रज्या ग्रहण कर ली । वैश्रमण के प्रवजित होने की बात जान कर रावण ने भी
शस्त्र रख दिये और तत्काल वैश्रमण मुनि के समीप आ कर नमस्कार किया और बोला-"हे महानुभाव ! आप मेरे ज्येष्ठ-बन्धु (मासी पुत्र )हैं, इसलिए अपने लघु-बन्धु का अपराध क्षमा करें। आप निश्चित हो कर लंकापुरी में राज्य करें। हम यहाँ से अन्यत्र चले जावेंगे।"
महात्मा वैश्रमणजी तो प्रवजित होते ही ध्यानस्थ हो गए थे। उन्होंने रावण की विनती की ओर लक्ष्य ही नहीं किया। महात्मा को निष्पृह जान कर रावण आदि उनकी
क्षमा चाहते और वन्दना-नमस्कार करते हुए चल दिये और लंकापुरी पर अपना अधिकार कर के विजयोत्सव मनाने लगे।
इतने में वनपालक ने उपस्थित हो कर निवेदन किया कि- “ वन में एक प्रचण्ड उन्मत्त हाथी घूम रहा है । वह आपके वाहन के योग्य है। उसके विशाल दंतशूल हैं मधुपिंगल वर्ण के नेत्र हैं, शिखर के समान उन्नत कुंभ स्थल है । वह अन्य हाथियों से उत्तम है ।"
रावण, वनपालक की बात सुन कर तत्काल चल निकला और वन में आ कर हाथी को वश में कर लिया तथा उस पर सवार हो कर लंका में प्रवेश किया । गजराज के
उत्तम गुणों से मुग्ध हो कर रावण ने उसका नाम 'भुवनालंकार' दिया ।
रावण राज्य-सभा में बैठा था। उस समय 'पवनवेग' नाम का विद्याधर उपस्थित हो कर कहने लगा;
" देव ! किष्किन्ध राजा के पुत्र सूर्य रजा और रुक्षरजा, पाताल-लंका में से किष्किन्धा नगरी गये थे। वहां यम के समान भयंकर यमराज के साथ उनका युद्ध हुआ।
चिरकाल तक युद्ध करने के पश्चात् यम राजा ने दोनों को पकड़ कर बन्दीगृह में डाल दिया और उन्हें नरक के नैरयिक के समान भयंकर दुःख दे रहा है।"
'महाराज ! वे आपके अनुचर-सेवक हैं, इसलिए पापात्मा यम से आप उनकी रक्षा करें । वे आपके हैं, इसलिए उनकी पराजय, आपकी ही मानी जायगी।"
पवनवेग की बात सुन कर रावण ने तत्काल सैन्य सज कर प्रयाण करने की आज्ञा
दी और स्वयं शस्त्र-सज्ज हो कर चला । किष्किन्धा नगरी के बाहर रावण ने यम का
कारागृह देखा, जहाँ नरक के समान दुःख देने को कुछ व्यवस्था की गई थी। जैसे- शिलास्फालन (बन्दी को शिला पर पछाड़ कर मारना) परशुच्छेद (फरशे से काटना) आदि । यह देख कर रावण ने कारागृह के रक्षक नरकपालों को त्रासित कर भगा दिया और सभी बन्दियों को मुक्त कर दिया । नरकपाल भाग कर यमराज के पास गये । यम क्रोध में भभक उठा और युद्ध करने के लिए आ डटा । दीर्घकाल तक भयंकर युद्ध हुआ।
जब भीषणतम युद्ध से भी रावण का पराभव नहीं हो सका, तो यम एक भयंकर दंड उठा कर रावण पर प्रहार करने दौड़ा। रावण ने तत्काल क्षुरप्र बाण छोड़ कर उस
दंड के टुकड़े कर दिए । यम ने रावण पर जोरदार बाण की वर्षा कर के उसे बाणों से ढक दिया, किन्तु रावण की युद्ध-चातुरी ने सभी बाणों को व्यर्थ कर दिया और खुद ने
भयंकर बाण-वर्षा कर के यम के देह को जर्जर एवं बलहीन कर दिया। इस मार से यम की शक्ति नष्ट हो गई । वह युद्ध भूमि से निकल कर विद्याधर नरेश इन्द्र के पास, रथनूपुर पहुंचा और निवेदन किया;-
'महाराज ! मैं अब यम का कार्य करने के योग्य नहीं रहा। मेरी सारी शक्ति रावण ने नष्ट कर डाली । वह यम का भी यमराज निकला। अब आप यह पद किसी अन्य बलवान् को दीजिए । रावण ने किष्किन्धा के नरकागार पर हमला कर के सभी नरकवालों को भगा दिया और सभी नारकों को नरक से निकाल कर स्वतन्त्र कर दिया।
रावण महाबली है, साथ ही क्षात्रव्रत का पालक है । इसी से मैं जीवित रह कर आपकी सेवा में पहुँच सका, अन्यथा मेरा प्राणान्त हो जाता।"
'स्वामिन् ! रावण ने वैश्रमण को जीत कर लंका का राज्य और पुष्पक विमान पर भी अधिकार कर लिया है और सुरसुन्दर जैसे बलवान् विद्याधर को भी जीत लिया है ।
उसने विजयोन्मत्त हो कर किष्किन्धा पर अधिकार कर लिया होगा। अब क्या उपाय करना, यह आप ही सोचें। मैं तो शक्तिहीन बन चुका हूँ। ।"
यम की दशा और रावण का पराक्रम जान कर विद्याधरपति इन्द्र कुपित हुआ।
उसने सैन्य संगठित कर युद्धभूमि में जाने के लिए आज्ञा दी। किन्तु मन्त्रियों के समझाने से युद्ध स्थगित रखा और यमराज को सुरसंगीत नगर देकर संतुष्ठ किया।
रावण ने किष्किन्धा का राज, सूर्यरजा को और ऋनपुर का राज्य ऋक्षरजा को दिया और स्वयं विजयोल्लासपूर्वक लंकानगरी में आया और अपने पितामह के राज्य का संचालन करने लगा।
दशरथ राजा
-------------
राजा दशरथ अयोध्यानरेश महाराज अनरण्य के पुत्र थे |
अनरण्य ने अपने बड़े पुत्र अनंतरथ के साथ दीक्षा ली थी |
अतः अयोध्या का राजपद दशरथ को
एक मास की अवस्था में प्राप्त हो गया |
दशरथ का बचपन का नाम क्षीरकंठ भी था |
--------------
युवा होकर दशरथ ने अयोध्या का राज्य बड़ी कुशलता से संभाला |
उनकी प्रशंसा दूर-दूर तक फ़ैल गई |
उनका पहला विवाह कुशस्थलपुर नरेश सुकोशल की पुत्री
अपराजिता के साथ हुआ |
अपराजिता का ही दूसरा नाम कौशल्या था |
------------
दूसरा विवाह सुमित्रा नाम की राजकुमारी के साथ हुआ |
तीसरा विवाह सुप्रभा नाम की राजकुमारी के साथ हुआ |
राजा दशरथ तीनों रानियों के साथ
सुख भोगते हुए शासन सञ्चालन करते रहे |
-------------
एक बार लंकेश्वर रावण ने किसी निमित्तज्ञानी से अपनी मृत्यु के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मिथिलापति जनक की पुत्री के कारण तेरी मृत्यु अयोध्यापति दशरथ-पुत्र के हाथों होगी |
-------------
इस पर रावण के भाई विभीषण ने दशरथ को मारने का संकल्प कर लिया |
इस सम्पूर्ण घटना की सूचना नारदजी ने पहले ही राजा दशरथ और
राजा जनक को दे दी |
-------------
मंत्रियों के परामर्श से राजा दशरथ तो
अपने महल से निकलकर वन में चले गए और
उनकी शय्या पर मंत्रियों ने एक पुतला बनवाकर लिटा दिया |
रात्रि को विभीषण आया और
पुतले का सिर काटकर उसने समझा कि
दशरथ का प्राणांत हो गया है |
वह खुश होता हुआ वापस चला गया |
-----------------
वन में निकलकर राजा दशरथ उत्तरापथ की ओर चले गए |
वहां कैकेयी का स्वयंवर हो रहा था |
कैकेयी ने दशरथ के गले में वरमाला डाल दी |
तब हरिवाहन आदि बड़े-बड़े पराक्रमी राजाओं ने इनका विरोध किया |
इन्होने सभी राजाओं को युद्धक्षेत्र में जीत लिया और
कैकेयी के साथ वहीँ रहने लगे |
अन्य रानियों को भी वहीँ बुला लिया और
सुख से रहने लगे |
-------------------
इस प्रकार दशरथ के चार रानियाँ थीं -
कौशल्या,
सुमित्रा,
सुप्रभा और
कैकेयी |
---------
कौशल्या ने राम को जन्म दिया |
सुमित्रा ने लक्ष्मण को जन्म दिया |
कैकेयी ने भरत को जन्म दिया |
सुप्रभा ने शत्रुघ्न को जन्म दिया |
------------
चारों पुत्रों के युवा होने पर राजा दशरथ अयोध्या लौट आये |
इसके बाद राम का विवाह सीता के साथ हो गया |
------------
एक बार महामुनि सत्यभूति संघ सहित अयोध्या पधारे |
उनके उपदेश से दशरथ को वैराग्य हो गया |
उन्होंने राम को राज्य देकर दीक्षा लेने का विचार किया |
उनके साथ ही भरत ने भी दीक्षा ग्रहण करने की इच्छा प्रकट कर दी |
पति और पुत्र का वियोग एक साथ सहने में असमर्थ होकर कैकेयी ने
भरत का राजतिलक माँगा |
लेकिन भरत सिंहासन पर बैठने को तैयार न हुए |
इस समस्या को हल करने के लिए राम ने वन जाने का निर्णय कर लिया |
इनके साथ ही सीताजी और लक्ष्मण भी वन को चले गए |
------------
भरत-कैकेयी आदि राम को वापस लाने गए,
लेकिन राम वापस नहीं लौटे |
इतना अवश्य हुआ कि
राम की आज्ञा मानकर भरत ने
शासन-सञ्चालन करना स्वीकार कर लिया |
-------------
इस व्यवस्था से संतुष्ट होकर राजा दशरथ ने महामुनि सत्यभूति के पास
दीक्षा ग्रहण कर ली और उग्र तप करने लगे |
आयु पूर्ण करके उन्होंने सद्गति प्राप्त की |
- जैन रामायण से
नोट- यह आलेख श्वेताम्बर मान्यता के आधार पर लिखा गया है |
अतः मान्यता भेद हो सकता है |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें