महावीर कथा 5

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      *महावीर के उपदेश ग्रुप से*
 📕 *भगवान महावीर स्वामी का जीवन चरित्र* 📕

🔴  *कानो में किले...* 🔴3⃣0⃣6⃣
🍁खरक वैद्य भगवान की आकृति👤 देखता रहा।उसे लगा कि इन महात्मा के मुखारविंद पर पीड़ा😔 की झाई दिखाई दे रही है।
 🍁उसने सिद्धार्थ से कहाँ ,"मित्र !इन महात्मा के शरीर मे कही कोई शूल🎯 लगा हुआ है ।उसकी पीड़ा इनके भव्य मुख पर स्पष्ट दिखई दे रही है ।"
 🍁सिद्धार्थ👳🏾 ने कहा ," यदि शल्य है ,तो तुम देखो और बताओ कि किस स्थान पर शल्य लगा है।"
वैद्य ने भगवान का सूक्ष्म 👀अवलोकन किया और बताया कि "किसी दृष्ट ने इन  महामुनिश्वर के कानों में किले ठोक दी है ।"

 🍁भगवान चले गए ।उसके बाद वैद्य ने कहा ," वह  मनुष्य था या राक्षस ? वैद्य को किले ठोकने वाले कि नीचता का विचार हुआ।"
"मित्र तुम उस नीच की बात😔😡 छोड़ो और ये किले निकल कर इन महर्षि की पीड़ा मिटाओ ।इनकी पीड़ा निवारण के साथ ही मुझे शांति मिलेगी"



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      *महावीर के उपदेश ग्रुप से*
 📕 *भगवान महावीर स्वामी का जीवन चरित्र* 📕

🔴 *वैद्य की चिंता..* 🔴3⃣0⃣7⃣
  🍁"यदि इस कार्य मे मेंर सर्वस्व💰💷 भी लग जाये तो मुझे चिंता नही होगी ,परन्तु जब तक इन महर्षि की वेदना नही मिटेगी ,तब तक मेंर हॄदय शांत नही😔 होगा।
🍁"यदि मेरे और तुम्हारे प्रयत्न से भगवान के दोनों शूल🎯 निकल गए और इन्हें शांति मिल गयी तो हम दोनों भवसागर🛳 से पार हो जाएंगे ।"
 🍁वैद्य बोला," मित्र !ये महात्मा क्षमा के सागर और परम श्रेष्ठ महामुनि😷 है ।इनका शरीर सुदृढ़ 💪🏾और बलशाली है।किसी मनुष्य की शक्ति नही की इन पर इस प्रकार का अत्याचार कर सके ।"
  "इन्होंने शांति पूर्वक यह भयानक अत्याचार 😞😔सहन किया है ।इतना ही नही ,ये इन शूलों🎯 को निकलवाने का प्रयत्न भी नही करते । "
 "हमने इन्हें पकड़ कर निरीक्षण परीक्षण किया परन्तु इन्होंने ये तक नहीं पूछा कि मेरे ये शूल🎯 निकल जावेंगे ?तुम निकाल दोंगे ? मेरा कष्ट दूर 😞😔हो जाएगा ?लगता है कि ये महात्मा निरपेक्ष हो गए है ....आत्म निष्ठ है।इनकी सेवा तो परमोत्कृष्ट सेवा है ।इसका लाभ तो लेना ही चाहिए ।"



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 📕 *भगवान महावीर स्वामी का जीवन चरित्र* 📕

🔴  *उपसर्ग किया दूर...* 🔴3⃣0⃣8⃣

तेलपात्र , औषधि 💊और कुछ सहायक ले कर सिद्धार्थ और वैद्य घर से चल पड़े ।भगवान तो उद्यान🏕 में पधार कर ध्यानस्थ😷 हो गए थे ।
 🍁सिद्धार्थ और खरक वैद्य उपचार की सामग्री ले कर उद्यान 🏝🏝में आये।उन्हीने भगवान के शरीर पर तेल का खूब मर्दन करवाया ,जिससे शरीर के संधे ढीले हो गए ।इसके बाद दो संडासे लिये और प्रभु के दोनों कानो 👂🏾👂🏾में से दोनों किलों के सिरे की पकड़ कर एक साथ खिंचे ,जिससे रक्त केसाथ दोनों किले⚒ निकल गई ।
 🍁इससे भगवान को महान वेदना😪😭 हुई ।इसके बाद रक्त पूछकर वैद्य ने संरोहनी औषधि🏺 लगा कर उन छिद्रों को बन्द कर दिया ।भगवान को शांति🙂 मिली ।
 🍁सिद्धार्थ श्रेष्ठि और खरक वैद्य ने शुभ अध्यवसाय एवम शुभयोग से देवायु का बन्ध किया और उस अधम ग्वाले 😡😡ने सातवी नरक का आयु बांधा ।यह भगवान पर छद्मस्थकाल का *अंतिम उपसर्ग* था।

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 📕 *भगवान महावीर स्वामी का जीवन चरित्र* 📕

🔴   *केवलज्ञान की प्राप्ति* 🔴3⃣0⃣9⃣
🍁भगवान को जीतने उपसर्ग हुए उनमें *जघन्य उपसर्गो में कठपुतना का उपद्रव ,मध्यम में संगम के कालचक्र का उपद्रव और उत्कृष्ट में कानों में से शुलोध्दार का उपसर्ग सर्वाधिक था*।ग्वाले 👲🏽से प्रारम्भ हुए उपसर्ग ,ग्वाले 👲🏽के उपसर्ग से ही समाप्त हुए।
 🍁भगवान अपापा नगरी से विहार कर के *ज्रम्भक गांव*🏢 पधारे ।उस गाँव के निकट *रुजुबालिका नदी* 🗾 थी ।गाँव के बाहर नदी के उत्तर तट पर शामक नामक गृहस्थ 👱🏽का खेत था।
 🍁वहाँ किसी गुप्त चैत्य के निकट शालवृक्ष 🌲🌲के नीचे बेले के तप सहित उत्कटित आसन से आतापना लेने लगे । *वैशाख शुक्ला दसमी* का दिन था ।दिन के चौथे प्रहर में *उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र* एवम *विजय मुहूर्त* में शुक्ल ध्यान में प्रविष्ट हुए ,क्षपक श्रेणी में आरूढ़ हो कर भगवान ने चारों घटिकर्मो का क्षय कर दिया और केवलज्ञान केवलदर्शन ⚡🌟💫प्राप्त कर दिया ।
🍁इन्द्रो के आसन कम्पायमान हुए ।वे देव देवियो के साथ हर्षोत्फुल्ल☺😊 हो कर भगवान के समीप आये ।🙏🏼


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      *महावीर के उपदेश ग्रुप से*
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🔴 *प्रथम देशना खाली गई....* 🔴3⃣1⃣0⃣

  🍁समवशरण 🏟की रचना हुई ।भगवान ने संक्षेप में धर्मदेशना🗣 दी।उस परिषद में सर्वविरत होने योग्य कोई मनुष्य👬 नही था ।वह अभावित परिषद थी ।इसलिए भगवान की वह देशना बिना सर्वविरती के खाली ही गई ।यह आश्चर्यभूत घटना थी ।क्योंकि *तीर्थंकर भगवंतों की प्रथम देशना व्यर्थ नही जाती ,कोई सर्वविरत होता ही है* ।
 🍁परन्तु भगवान की प्रथम देशना खाली गई ।इन्द्रादि देवो ने केवल महोत्सव कर के समवशरण 🏟की रचना की थी ।इसलिए भगवान ने कल्पानुसार देशना दी।
 🍁भगवान ज्रम्भिक से विहार कर के *मध्यमअपापा* नगरी पधारे ।इस नगरी के सोमिल नामक ब्राम्हण👲🏽 ने एक महायज्ञ🔥 का आयोजन किया था ।इस यज्ञ🔥 को सम्पन्न करवाने के लिए उसने अपने समय के वेदों के पारगामी ,महाविद्वान ऐसे ग्यारह ब्राम्हण👲🏽👲🏽 उपाध्यायों को आमंत्रित किया था

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🔴  *दूसरा समवशरण...* 🔴3⃣1⃣1⃣
  🍁इंद्रभूतिजी ,अग्निभूतिजी ,वायुभूतिजी ,व्यक्तजी ,सुधमाजी ,मण्डितपुत्रजी ,मौर्यपुत्रजी ,अकम्पितजी ,अचलभ्रताजी ,मेतार्यजी ,प्रभासजी .....ये सभी पंडित👲🏽👲🏽 अपने समय के प्रकांड विद्वान थे और अपने अपने सैकड़ो शिष्यों केसाथ उस यज्ञ🔥 में उपस्थित हुए थे । बड़े समारोह एवम ठाठ से यज्ञ 🔥हो रहा था।
 🍁उस समय भगवान महावीर सर्वज्ञ सर्वदर्शी हो कर अपापा नगरी पधारे और *महासेन उद्यान* में विराजे ।देवो ने भव्य समवशरण🏟 की रचना की ।
 🍁भ महावीर ने भव्य जीवो को अपनी अतिशय सम्पन्न गंभीर वाणी से धर्म देशना दी।भगवान के समवशरण में देव देवी👫 भी आ रहे थे ।
 🍁देवो को आते हुए देख कर उपाध्याय इंद्रभूति👲🏽 ने अपने साथी अन्य ब्राम्हणों से कहा देखो ,"इस यज्ञ🔥 का प्रभाव की हमने मंत्रोच्चार करके देवो का आव्हान किया तो मन्त्र बल से आकर्षित😇☺ हो कर देवगण साक्षात ही यज्ञ में🔥 चले आ रहे है ।"
✍ संकलन
      बेहेन सोनालीजी कटारिया
      निरगुड़सर,पूना
    *महावीर के उपदेश ग्रुप टीम*
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🔴  *इंद्रभूति का क्रोध* 🔴3⃣1⃣2⃣
किन्तु जब देवगण यज्ञमंडप 🔥के समीप हो कर ,उपेक्षा🙁😟 करते हुए आगे चले गए ,तो उस समय वहाँ उपस्थित लोग👫👬 कहने लगे कि नगर के बाहर उद्यानमें 🏝सर्वज्ञ सर्वदर्शी जिनेश्वर भगवान पधारे है ।ये देव उन भगवन्त की वंदना🙏🏼🙏🏼 करने जा रहे हैं ।
 🍁लोगो के मुँह से सर्वज्ञ शब्द सुनते ही इंद्रभूति कोपयमन😡 हो गए और कर्कश स्वर में बोले
 ," धिक्कार है इन देवो को !! क्या मेरे सामने और मुझ से भी बढ़ कर कोई सर्वज्ञ है इस संसार मे ? "
 "सत्य ही कहा है कि मरुदेश के लोग अमृत के समान मधुर फल देनेवाले आम्रवृक्ष🌲 को छोड़ कर केरडा के झाड़ 🌵के पास जाते है।अरे मनुष्य मूर्खता करे तो वे अज्ञानी होने के कारण उपेक्षणीय हो सकते है ,परन्तु देव भी उस पाखंडी के प्रभाव में आ कर ,उसके पास जाने की मूर्खता कर रहे है ।"
 "लगता है कि यह पाखंडी कोई महानदम्भी एवम धूर्त है।मै इन मनुष्यो👬👬 और उन देवो के देखते ही उस पाखंडी की सर्वज्ञता का दम्भ खुला करके उसके घमंड को छिन्नचिन्न 😡😡कर दूंगा"



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🔴  *इंद्रभूतिजी का सन्देह...* 🔴3⃣1⃣3⃣

🍁इस प्रकार कहते और कोप 😡😡में सुलगते हुए इंद्रभूतिजी अपने 500 शिष्योंको साथ उपवन🏝 में चले गए ।

 🍁समवशरण की दैविक रचना🏟 और इन्द्रो द्वारा वन्दित🙏🏼 अतिशय सम्पन्न भ महावीर को देखते ही इंद्रभूतिजी आश्चर्यान्वित 😳😱हो गए ।सहसा उनके हृदय ने कहा," अहो कितनी भव्यता ??कैसा अलौकिक व्यक्तित्व!! "
  🍁सहसा उनके कानों में भगवान का सम्बोधन गुंजा..."इंद्रभूति गौतम !! तुम आये  ..तुम्हारा आगमन श्रेयस्कर होगा ।"
 इंद्रभूति ने सोचा 🤔 "क्या ये मेरा नाम और गोत्र जानते है ?" फिर अपने आप ही समाधान☺😊 हो गया मै तो जगत प्रसिद्ध😎 हु ,इसलिए ये मुझे जानते होंगे ।परन्तु ये यदि मेरे मन मे रहे हुए गुप्त सन्देह को जान ले और उसका अपनी ज्ञान गरिमा से निवारण कर दे ,तब मैं इन्हें सर्वज्ञ सर्वदर्शी मानू।


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