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1️⃣ लोगस्स सूत्र का मूल नाम क्या है❓
🅰️। नाम स्तव सूत्र/चर्तुविंशति स्तव सूत्र
2️⃣लोगस्स सूत्र नाम क्युं पड़ा❓
🅰️प्रथम शब्द लोगस्स होने से यह उस नाम से प्रसिद्ध हुआ ।
3️⃣इस सूत्र में कितनी गाथाएं हैं❓
🅰️ सात गाथाएं
4️⃣इसके कुल अक्षर कितने हैं❓
🅰️ 256 अक्षर
5️⃣इसकी संपदाएं कितनी हैं❓
🅰️ 29
6️⃣प्रत्येक गाथा में कितने चरण है❓
🅰️ चार
7️⃣लोगस्स किस सूत्र का विशेष अंग है और कौन सा वो बताएं❓
🅰️आवश्यक सूत्र का,। 6आवश्यक में से दूसरा आवश्यक
8️⃣इस सूत्र में कौन सी मुद्रा की जाती है❓
🅰️। काउस्सग,जिन मुद्रा
9️⃣लोगस्स की प्रथम पंक्ति में भगवान को कैसा बताया गया है❓
🅰️ भगवान को लोक के उद्योत करने वाले बताएं है।
1️⃣0️⃣लोगस्स सूत्र में कीर्तन का प्रयोग कितने बार हुआ है❓
🅰️ 2बार । पहली गाथा और छठ्ठी गाथा में
1️⃣1️⃣कित्तइस्सं का अर्थ क्या है ❓
🅰️ मैं आपका कीर्तन करूंगा/करूंगी
1️⃣2️⃣ चौबीस जिन की स्तुति को कुल कितनी गाथाओं में निरूपित किया गया है ❓
🅰️। 3गाथाओं में (3,4,5नंबर की गाथा में)
1️⃣3️⃣लोगस्स में परमात्मा की स्तुति करने के कौन से 2ठोस कारण बताएं है ❓
🅰️1-विहुयरयमला
2-पहीणजरमरणा
1️⃣4️⃣भगवान किस चीज से रहित हैं ❓
🅰️कर्म और कषाय से,रज और मल से रहित हैं।
1️⃣5️⃣ परमात्मा ने जन्म -मरण का क्या किया है ❓
🅰️ क्षय किया है,।क्षीण किया है
1️⃣6️⃣परमात्मा के कीर्तन,वंदन,पूजन से क्या फल मिलता है ❓
🅰️ आरोग्य,बोधि लाभ,समाधि
1️⃣7️⃣चंद्र से भी शीतल एवं सूर्य से भी अधिक प्रकाश मान प्रभु का एक और विशेषण क्या बताया गया है ❓
🅰️ सागर जैसे गंभीर
1️⃣8️⃣ सागर जैसे गंभीर विशेषण वाले जिनेश्वर से अंत में क्या प्रार्थना की गई है ❓
🅰️हे!अनंत सिद्धों,मेरी आत्म दशा स्पष्ट करो, मुझे सिद्ध पद दो
1️⃣9️⃣लोगस्स सूत्र की 7गाथाओ से कौन सी साधना होती है ❓
🅰️ 7चक्रो की। मूलाधार चक्र से सहस्त्रार चक्र तक की
2️⃣0️⃣लोगस्स सूत्र से किस आचार की विशुद्धि होती है ❓ और क्या प्राप्त होता हैं ❓
🅰️ दर्शनाचार की विशुद्धि होती है और सम्यकत्व की प्राप्ति होती है
2️⃣1️⃣इस सूत्र में हमारी यात्रा कहां से कहां तक की है❓
🅰️ इस लोक से सिद्ध शिला, मोक्ष तक की है।
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1️⃣लोग्गस की गाथा कितनी ❓
1️⃣🅰️७
2️⃣प्रथम गाथा के अर्थ क्या ⁉️
2️⃣🅰️२४ तीर्थंकरजी का कीर्तन
3️⃣दूसरी गाथा में कितने तीर्थंकरकी वंदना आती है ⁉️
3️⃣🅰️एक से आठ की
4️⃣तीसरी गाथा में कितने तीर्थंकरजी के वंदना आती है ⁉️
4️⃣🅰️नो से सोलह तक
5️⃣चौथी गाथा में कितने तीर्थंकर⁉️
5️⃣🅰️१७ से २४ की
6️⃣पाँचवीं गाथा से भावना क्या ⁉️
6️⃣🅰️सब तीर्थंकर मुजपर प्रसन्न हो
7️⃣छःठीगाथा के क्या माँगते है
7️⃣🅰️सिद्ध भगवान मुजे आरोग्य बोधि प्रदान करे
8️⃣सातवी गाथा में क्या भावना करते हैं ⁉️
8️⃣🅰️सिद्धि पद प्रदान करे
9️⃣लोग्गस का दूसरा नाम ⁉️
9️⃣🅰️चतुर्विश्तव
1️⃣0️⃣लोग्गस के पाठ से क्या किया जाता है ⁉️
1️⃣0️⃣🅰️काउससग या ध्यान
1️⃣1️⃣लोग्गस के काउसाग कितने स्वासोस्वाँस का ⁉️
1️⃣1️⃣🅰️28
1️⃣2️⃣तिखुतो के पाठ से कौन सी क्रिया ⁉️
1️⃣2️⃣🅰️गुरु वंदन की क्रिया
1️⃣3️⃣अरिहंत महदेवो का पाठ का दूसरा नाम ⁉️
1️⃣3️⃣🅰️साम्यकत्व सूत्र
1️⃣4️⃣आलोचना का पाठ कौन सा ⁉️
1️⃣4️⃣🅰️इरयावही
1️⃣5️⃣कायोत्सर्ग की प्रतिज्ञा कौन से पाठ से ⁉️
1️⃣5️⃣🅰️तस्स उत्तरी पाठ से
1️⃣6️⃣चोदह स्वेपन स्तवन के रचयिता ⁉️(दशमा स्वर्ग थकी )
श्री1️⃣6️⃣🅰️ ज्ञान चंद मुनि जी कृत
1️⃣7️⃣बोल बोल आदेशवर वाला स्तवन के रचयिता ⁉️
1️⃣7️⃣🅰️घेवर मुनि जी
1️⃣8️⃣एक नवकार कितने स्वाँसका ⁉️
1️⃣8️⃣🅰️आठ
1️⃣9️⃣गुरु को विधि पूर्वक द्वादश्वर्त वंदन का लाभ ⁉️
1️⃣9️⃣🅰️८४००० दानशाला बँधवाने का लाभ
2️⃣0️⃣रावण जी की कितनी पुत्रियाँ⁉️
2️⃣0️⃣🅰️सवा लाख
2️⃣1️⃣हरिभद्रजी ने कितने ग्रंथ रचे ⁉️
2️⃣1️⃣🅰️१४४४
🌹1 -लोगस्स की 4 गाथा ओ में वंदामि शब्द कितनी बार आया हे ❓
🅰 🙏🏻✅2
🌹2- लोगस्स की 4 गाथा ओमे वन्दे शब्द कितनी बार आया है❓
🅰🙏🏻✅3बार
🌹3 - लोगस्स का 1 अन्य नाम क्या है❓
🅰 3✅🙏🏻 Naamstva चतुर्विंशति
🌹4 - लोगस्स में जिणं या जीणे शब्द कितनी बार आया है❓
🅰 ✅🙏🏻4 baar
🌹5 - लोगस्स की तीसरी गाथा में कितने भगवान का वर्णन है❓
🅰 ✅🙏🏻8
🌹6 - 24 तीर्थंकर में स्त्री तीर्थंकर के अगले भगवान कौन हे❓
🅰 🙏🏻✅ मुनिसुव्रत जी
🌹7 - लोगस्स में किस भगवान के 2 नाम लिए गए है❓
🅰 ✅🙏🏻सुविधिनाथ जी
🌹8 - लोगस्स की वो गाथा बताये जिसमे वंदे, मुनि, रिट्ठा, पासं शब्द आते है❓
🅰 🙏🏻✅कुंथुंअरंच मल्लिं-------------
🌹9 - लोगस्स की वो गाथा बताये जिसमे धर्मनाथ जी का नाम है❓
🅰 🙏🏻✅ सुविहिं च पुफ्फदंतं
🌹10 -लोगस्स के पाठ करने से कौन से लाभ होते है ❓
🅰
✅🙏🏻आरोग्य & बोधि लाभ
🌹11 - लोगस्स के द्वारा हम अंतिम चरण में क्या प्रार्थना करते है❓
🅰 🙏🏻✅ सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु...... Sidhhi ki prapti ho
🌹12 - भगवानो को किसके समान निर्मल बताया गया❓
🅰🙏🏻✅ चन्द्रमा के समान
🌹13 -लोगस्स के अनुसार तीर्थंकर ने धर्म तीर्थ के द्वारा संसार को केसा बताया है ❓
🅰 🙏🏻🙏🏻✅लोगस्स उज्जोयगरे :- prakasmaan
🌹14 - लोगस्स में अरिष्ट नेमिजि का क्या नाम बताया❓
🅰 🙏🏻✅ रिट्ठनेमिं
🌹15 - महावीर स्वामी का क्या नाम लिया गया है❓
🅰 ✅🙏🏻 वद्धमाणं🙏🏻
🌹16 - मुनि सुव्रत स्वामी भगवान का क्या नाम लिखा गया है❓
🅰 🙏🏻✅ मुनिसुवयं✅
🌹17 - ऋषभ देव भगवान का क्या नाम लिया गया है❓
🅰 🙏🏻✅ उसभ✅🙏🏻
🌹18 - लोगस्स में तीर्थंकर प्रभु का स्वाभाव केसा बताया गया है❓
🅰 🙏🏻✅ सागरवर गम्भीरा:-
Sagar ki tara gambhir
🌹19 - धर्मनाथ भगवान के बाद किनका नाम आता है❓
🅰 🙏🏻✅ शान्तिनाथजी✅🙏🏻
🌹20 - लोगस्स की 1 माला में कितनीबार पाठ किया जाता है❓
🅰🙏🏻✅27
🌹 21 loggas sutra kaha se liya gaya h
🅰🙏🏻✅ Aavashyak Sutra
लोगस्स
Q1-लोगस्स का पाठ कौनसे शास्त्र में आया है?
A-आवश्यक सूत्र में।
Q2-इस पाठ के अन्य नाम क्या है?
A-चतुर्विशंतिस्त्व, नामस्तव, चउविस्तव एवं उत्कीर्तन है।
Q3-इस पाठ को चतुर्विशतिस्तव का पाठ क्यूँ कहते हैं?
A-क्यूँकि 24 तीर्थंकर की स्तूति की जाती है।
Q4-लोगस्स में द्रव्य की अपेक्षा का किस प्रकार वर्णन किया है?
A-24 तीर्थंकरों के नाम है।
Q5-लोगस्स में क्षेत्र की अपेक्षा का किस प्रकार वर्णन किया है?
A-इस भारत क्षेत्र के तीर्थंकरों के नाम है।
Q6-लोगस्स में काल की अपेक्षा का किस प्रकार वर्णन किया गया है?
A-इस अवसर्पणी काल के हैं।
Q7-लोगस्स में भाव की अपेक्षा का किस प्रकार वर्णन किया गया है?
A-24 तीर्थंकरों की वंदना स्तूति एवं प्रथाना है।
Q8-लोगस्स में कितनी गाथाएँ हैं?
A-7 गाथाएँ हैं।
Q9-लोगस्स में कितने चरण हैं?
A-28 चरण हैं।
Q10-लोगस्स में कितने अक्षर हैं?
A-256 अक्षर हैं।
Q11-लोगस्स की पहली गाथा में क्या है?
A-प्रतिज्ञा है।
Q12-लोगस्स की दूसरी, तीसरी, चौथी गाथा में क्या है?
A- 24 तीर्थंकरों के नाम हैं।
Q13-लोगासा की पाँचवी,छठी और साथवी गाथा में क्या है?
A-प्रार्थना है।
Q14-लोगस्स की प्रथम गाथा कौनसे छंद में है?
A-अनुष्टूप छंद में हैं।
Q15-लोगस्स की दूसरी से साथवी गाथा कौनसे छंद में है?
A-आर्या छंद में हैं।
Q16-लोगस्स के पाठ में तीर्थंकर से क्या-क्या माँगा है?
A- तीर्थंकरों से आरोग्य, प्रसन्नता,बोधि,समाधि और सीधी सुख की माँग की गई है
Q17-तीर्थंकरों को प्रकृति के माध्यम से किस-किस से श्रेष्ठ बताया है?
A-तीर्थंकरों को सूर्य चंद्र और सागर से श्रेष्ठ बताया गया है।
Q18-लोगस्सा के पाठ में ज्ञान कहा आता है?
A-आइच्चेसु अहियं पयसायरा।
Q19-लोगस्सा में दर्शन कहाँ आता है?
A-चन्देसु निम्मलयरा।
Q20-लोगस्सा में चारित्र कहाँ आता है?
A-सागर वर गंभीरा।
Q21-लोगस्स पाठ के बोही शब्द से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-ज्ञानवरणिय और दर्शनावर्निय कर्म
Q22-लोगस्सा में आरुग्ग से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-वेदनीय कर्म
Q23-लोगस्सा में समाहि से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-मोहनिय कर्म
Q24-लोगासा में पहिण जर मरणा से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-आयुष्य कर्म
Q25-लोगस्सा में उत्तमा से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-उच्च गोत्र का
Q26-लोगस्स में वर से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-शुभ नाम का।
Q27-लोगस्स में लाभं से कौनसे कर्म का उल्लेख होता है?
A-अंतराय कर्म।
Q28-लोगस्स में तीर्थंकर की क्या विशेषता बताई गयी है?
A-तीर्थंकर भगवान बढ़ापा एवं मृत्यु से मुक्त है।
Q29- तीर्थंकर किस से अधिक निर्मल है?
A-तीर्थंकर चंद्रों से अधिक निर्मल है।
Q30-तीर्थंकर किससे अधिक प्रकाशमान है?
A- तीर्थंकर सूर्या से अधिक प्रकाशमान है।
Q31-तीर्थंकर किसके समान गम्भीर है?
A-तीर्थंकर महासागर के समान गम्भीर है।
Micchami dukkadam
जिज्ञासा--
कायोत्सर्ग में नवकार या लोगस्स ही क्यों गिना जाता है? वह भी कहीं चंदेसु निम्मलयरा तक, कहीं सागरवर गंभीरा तक और कहीं सम्पूर्ण भी-ऐसा किसलिए?
पूर्व कालिक साधु जो दीर्घकाल तक काउसग्ग में रहते थे, काउसग्ग में क्या गिनते होंगे?
समाधान--
कायोत्सर्ग में आत्मा को अत्यन्त स्थिर कर आत्मा के स्वरूप का चिंतन करना यह मूल मार्ग था। योगी महात्मा काउसग्ग में आत्म स्वरूप का चिंतन करते थे। लोक का स्वरूप सोचते, इस कारण अत्यन्त दीर्घकाल तक काउसग्ग में रहते परन्तु धर्मानुष्ठान करने वाले सर्व साधारण जीव इतना सूक्ष्म पढ़े हुए नहीं होते अतः आसन्न उपकारी इस वर्तमान चौबीसी के चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति के रूप में चतुर्विंशति-स्तव अर्थात् लोगस्स गिना जाता है। लोगस्स की सात गाथाएं हैं-एक-एक गाथा में चार-चार पद हैं। एक-एक श्वास में एक-एक पद बोला जाता है अतः लोगस्स के अट्ठाइस पद होने के कारण २८ श्वासोच्छ्वास उत्पन्न होते हैं। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार धारणा, ध्यान और समाधि-योग के ये आठ अंग हैं। इसी तरह श्वास के अनुसार पदों का उच्चारण भी काउसग्ग का एक स्वरूप है।
संवत्सरी प्रतिक्रमण का जो बड़ा कायोत्सर्ग है, वह एक हजार आठ श्वास के परिमाण वाला है। चंदेसु निम्मलयरा तक गिनने से एक लोगस्स के २५ श्वास होने से ४० लोगस्स के १००० श्वास हुए। तदुपरान्त एक नवकार गिनने से ८ श्वास होते हैं १००० में ८ श्वास मिलाने से १००८ श्वास हो जाते हैं-इस दृष्टि से कुछ परम्पराओं में संवत्सरी के कायोत्सर्ग में लोगस्स का पाठ चंदेसु निम्मलयरा तक गिना जाता है और कुछ परम्पराओं में पूरा लोगस्स बोला जाता है।
इसी प्रकार चातुर्मासिक प्रतिक्रमण का कायोत्सर्ग ५०० श्वासोच्छ्वास का है अतः चंदेसु निम्मलयरा तक गिनते हुए २० लोगस्स गिनने से उपर्युक्त श्वासों की संख्या पूर्ण होती है। पक्खी प्रतिक्रमण का कायोत्सर्ग ३०० श्वासो का है। श्वासो की दृष्टि से १२ लोगस्स गिने जाते हैं इस प्रकार चंदेसु निम्मलयरा तक की गणना श्वासोच्छ्वास से संबंध रखती है। सुबह के प्रतिक्रमण में जो १०८ श्वास का कायोत्सर्ग है वह दुःस्वप्न आदि के निवारण के लिए है वहां सागरवर गंभीरा गिनने से एक लोगस्स के २७ श्वास के हिसाब से १०८ श्वास पूरे होते हैं, इसलिए सागरवरगंभीरा तक गिना जाता है और आत्मशांति हेतु दुःख क्षयादि के निमित्त से जब कायोत्सर्ग किया जाता है तब शांति के निमित्त होने के कारण परिपूर्ण लोगस्स गिना जाता है।
लोगस्स का जो अभ्यस्त न हो उसकी सरलता सुविधा के लिए उसकी जगह रूपक के तौर पर नवकार से कायोत्सर्ग गिना जाता है। कायोत्सर्ग जब पूरा हो जाए तब कुछ विशेष उच्चारण के रूप में नमस्कार महामंत्र बोलकर कायोत्सर्ग पूरा किया जाता है।
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